सागर-एक विद्यालय, तीन पीढ़ियां और 40 साल की सेवा, शिक्षक को गांव ने दी भावभीनी विदाई
शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी उतने ही जरूरी हैं—यह संदेश देते हुए सागर जिले के राहतगढ़ ब्लॉक के ग्राम झिला में पदस्थ वरिष्ठ शिक्षक और पूर्व प्राचार्य राजेंद्र प्रसाद तिवारी भावुक माहौल में सेवानिवृत्त हुए। उनके सम्मान में आयोजित विदाई समारोह न सिर्फ एक शिक्षक की सेवा का सम्मान था, बल्कि शिक्षा के प्रति समर्पण की तीन पीढ़ियों की विरासत का उत्सव भी बन गया। ग्राम झिला की प्राथमिक शाला में वर्षों तक अपनी सेवाएं देने वाले राजेंद्र प्रसाद तिवारी के विदाई समारोह में समस्त शिक्षक स्टाफ, परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। पूरे गांव ने मिलकर फूल-मालाओं, शाल और श्रीफल भेंट कर उनका सम्मान किया। इसके बाद विद्यालय से उनके निवास तक ससम्मान विदाई जुलूस निकाला गया, जिसने माहौल को भावनात्मक बना दिया।
विदाई समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षक राजेंद्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार भी बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि यह स्कूल उनके परिवार के लिए सिर्फ कार्यस्थल नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा रहा है। उनके दादाजी इसी विद्यालय में प्रिंसिपल रहे, इसके बाद उनके पिताजी ने भी इसी स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में सेवाएं दीं और अब वे स्वयं इसी विद्यालय से प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। तिवारी ने अपने 40 वर्षों के सेवा काल को याद करते हुए बताया कि उन्होंने बीआरसी पद पर रहते हुए और योग विभाग में पदाधिकारी के रूप में भी कार्य किया। खास बात यह रही कि उनकी 40 साल की सेवा में से 38 वर्ष उन्होंने अपने ही गांव झिला में शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित किए। इस दौरान उन्हें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, सहयोगी शिक्षकों और ग्रामवासियों का निरंतर सहयोग और स्नेह मिलता रहा।
शाम के समय राहतगढ़ नगर के मधुबन गार्डन में एक विशाल विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने सहभागिता की। सहभोज के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में तिवारी के प्रति लोगों का सम्मान और स्नेह साफ झलकता नजर आया। यह विदाई समारोह सिर्फ एक शिक्षक के सेवानिवृत्त होने का नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और सेवा की उस परंपरा का सम्मान था, जिसने पूरे गांव को दिशा दी। राजेंद्र प्रसाद तिवारी की विदाई के साथ ही ग्राम झिला के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय हमेशा के लिए दर्ज हो गया।