सागर- कलेक्टर का पीए बनकर ठगी करने वाला आरोपी को 4 साल की सजा में केंद्रीय जेल सागर भेजा
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले शातिर आरोपी को आखिरकार कानून ने कड़ा संदेश दे दिया है। स्वयं को कलेक्टर सागर का पीए बताकर अपर कलेक्टर के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने और कलेक्टर कार्यालय में नौकरी लगवाने का झांसा देकर रकम हड़पने वाले आरोपी वरुण सेन को न्यायालय ने 4 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को केंद्रीय जेल सागर भेज दिया गया है। यह फैसला सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश श्री समरेश सिंह के न्यायालय द्वारा आज दिनांक 26 दिसंबर 2025 को सुनाया गया। न्यायालय ने इस प्रकरण में आरोपी वरुण सेन को दोषी मानते हुए सजा सुनाई, जबकि अन्य दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
शासन की ओर से पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक दीपक पौराणिक ने बताया कि यह मामला थाना कैंट क्षेत्र का है। फरियादिया रेखा भारती ने दिनांक 31 मई 2024 को थाना कैंट में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी वरुण सेन उसके घर आया और स्वयं को कलेक्टर सागर का पीए बताते हुए उसके बच्चों और रिश्तेदारों को कलेक्टर कार्यालय एवं अन्य सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का झांसा दिया। आरोपी ने इस झांसे में आकर फरियादिया और उसके परिजनों से कुल 1 लाख 85 हजार रुपये नकद और फोन-पे के माध्यम से वसूल लिए। इतना ही नहीं, आरोपी ने कलेक्टर कार्यालय सागर का फर्जी आदेश तैयार किया, जिस पर तत्कालीन अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी के जाली हस्ताक्षर कर उसे फरियादिया की पुत्री शिवानी अहिरवार के नाम से सौंप दिया।
जब फरियादिया कलेक्टर कार्यालय पहुंची, तब आदेश के नकली होने का खुलासा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी और एडिशनल एसपी के भी फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए थे, जिनका उपयोग ठगी के लिए किया गया। अपर लोक अभियोजक दीपक पौराणिक ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में 25 साक्षियों के बयान कराए गए और 75 महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। मजबूत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दोषी ठहराया। यह फैसला न केवल ठगी के शिकार लोगों के लिए न्याय की जीत है, बल्कि सरकारी नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों के लिए भी कड़ा संदेश है कि कानून से बच पाना आसान नहीं।