खिलाड़ियों ने प्रमाण पत्र फाड़े, नगद पुरस्कार की मांग पर खुला विरोध, समापन पर हंगामा
एमपी के खरगोन में आयोजित सांसद खेल महोत्सव का समापन उस वक्त विवादों में घिर गया, जब जिले के छात्र-छात्रा खिलाड़ियों ने अपने ही सम्मान को ठुकराते हुए विरोध प्रदर्शन कर दिया। समापन समारोह के दौरान आक्रोशित खिलाड़ियों ने प्रमाण पत्र फाड़ दिए और मेडल मैदान में फेंक दिए। नगद पुरस्कार की मांग को लेकर खिलाड़ियों ने राज्यसभा सांसद सुमेरसिंह सोलंकी के सामने खुला विरोध दर्ज कराया, जिससे कार्यक्रम स्थल पर तनावपूर्ण माहौल बन गया। खरगोन शहर के स्टेडियम मैदान में सांसद खेल महोत्सव का समापन समारोह आयोजित किया गया था। समारोह में बड़ी संख्या में खिलाड़ी, अभिभावक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। जैसे ही विजेता खिलाड़ियों को केवल प्रमाण पत्र और मेडल दिए गए, खिलाड़ियों में असंतोष फैल गया। खिलाड़ियों का आरोप है कि प्रतियोगिता से पहले नगद पुरस्कार देने का प्रचार किया गया था, लेकिन समापन के समय उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने राज्यसभा सांसद सुमेरसिंह सोलंकी का घेराव कर नगद पुरस्कार की मांग शुरू कर दी। देखते ही देखते माहौल गर्मा गया। खिलाड़ियों का कहना था कि पड़ोसी जिले बड़वानी में सांसद खेल महोत्सव के दौरान खिलाड़ियों को नगद राशि दी गई, जबकि खरगोन में उन्हें केवल प्रमाण पत्र देकर टाल दिया गया। स्थिति बिगड़ती देख सांसद सुमेरसिंह सोलंकी ने खिलाड़ियों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने मंच से स्पष्ट किया कि उनके पास नगद पुरस्कार देने के लिए कोई अलग से बजट उपलब्ध नहीं है। जहां भी नगद राशि दी गई है, वह स्थानीय स्तर पर फंड की व्यवस्था से दी गई है। हालांकि खिलाड़ियों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। हालात बिगड़ते देख सांसद कुछ देर बाद अपने वाहन में बैठकर कार्यक्रम स्थल से रवाना हो गए।
समारोह में कलेक्टर भव्या मित्तल और एसपी रविंद्र वर्मा भी मौजूद थे। प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए खिलाड़ियों को शांत कराने की कोशिश की। जिला खेल अधिकारी पवि दुबे ने बताया कि सांसद खेल महोत्सव में नगद पुरस्कार का कोई प्रावधान नहीं था और इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया। छात्रा खिलाड़ी ने बताया कि “हमें नगद पुरस्कार का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन अंत में सिर्फ प्रमाण पत्र दे दिए गए।” सुमेरसिंह सोलंकी, राज्यसभा सांसद ने बताया कि “मेरे पास नगद पुरस्कार देने का कोई बजट नहीं है।” पवि दुबे, जिला खेल अधिकारी ने बताया कि “महोत्सव में नगद राशि का प्रावधान नहीं था।” खिलाड़ियों का यह विरोध अब चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के नाम पर की गई व्यवस्थाओं में पारदर्शिता कब सुनिश्चित होगी, ताकि ऐसे हालात दोबारा न बनें।