मंडी में किसानों का फूटा गुस्सा, नीलामी ठप कर किया जोरदार प्रदर्शन
एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के पथरिया कृषि उपज मंडी में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब बिना किसी पूर्व सूचना के व्यापारियों ने अनाज खरीदी से हाथ खड़े कर दिए। खरीदी बंद होने से नाराज किसानों ने मंडी परिसर में जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके चलते नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई। अचानक बने हालातों से मंडी में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया।
दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे किसानों का कहना था कि वे सुबह से नीलामी की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन व्यापारियों ने बिना कारण खरीदी करने से इंकार कर दिया। इससे किसानों की मेहनत, समय और खर्च—all बेकार चला गया। आक्रोशित किसानों ने एकजुट होकर मंडी परिसर में नारेबाजी की और मंडी का मुख्य द्वार बंद कर दिया, जिससे आवागमन भी प्रभावित हुआ।
सूचना मिलते ही पथरिया एसडीएम निकेत चौरसिया, तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से संवाद कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी उपज की खरीदी सुनिश्चित की जाएगी और समस्या का जल्द समाधान निकाला जाएगा।
बताया जा रहा है कि दो दिन पूर्व भावांतर भुगतान में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी सामने आई थी। इस मामले में पांच व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसी कार्रवाई के विरोध में अन्य व्यापारियों ने मंडी नीलामी में हिस्सा नहीं लिया, जिससे किसानों में भारी आक्रोश फैल गया।
करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद मंडी परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। एसडीएम निकेत चौरसिया ने व्यापारियों को एसडीएम कार्यालय बुलाकर अनाज खरीदी को लेकर चर्चा की और स्पष्ट किया कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं पथरिया थाना प्रभारी अमित मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर पहले तीन आवेदनों के आधार पर तीन प्रकरण दर्ज किए गए थे,
जबकि बाद में प्राप्त दो अन्य आवेदनों पर भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई है। प्रशासनिक आश्वासन के बाद किसानों ने प्रदर्शन तो समाप्त कर दिया, लेकिन मंडी व्यवस्था और व्यापारियों के रवैये को लेकर किसानों में असंतोष बना हुआ है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।