MP | पहली बार वायुसेना के हेलीकॉप्टर से बाघिन की शिफ्टिंग; MP से राजस्थान भेजी
देश में बाघ संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है। पेंच टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश से लगभग तीन वर्ष की एक स्वस्थ बाघिन को सफलतापूर्वक राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया। यह अंतर-राज्यीय ट्रांसलोकेशन न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि टाइगर लैंडस्केप को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल भी मानी जा रही है। इस विशेष अभियान में भारतीय वायुसेना के Mi-17 हेलीकॉप्टर की मदद ली गई, जिससे बाघिन को सुरक्षित और कम समय में राजस्थान पहुंचाया जा सका। सुबह निर्धारित समय पर पेंच टाइगर रिजर्व में बाघिन को विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम ने बेहोश किया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे विशेष रूप से तैयार किए गए केज में रखा गया और फिर हेलीकॉप्टर के माध्यम से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व ले जाया गया।
बाघिन की निगरानी पिछले एक महीने से अत्याधुनिक तकनीक से की जा रही थी। AI आधारित कैमरा ट्रैप और मोशन सेंसर्स के जरिए उसके मूवमेंट, व्यवहार और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी गई। इन्हीं वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर यह तय किया गया कि बाघिन स्थानांतरण के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। यह पूरा ऑपरेशन पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन और राजस्थान वन विभाग के बीच बेहतर तालमेल और टीम वर्क का उदाहरण रहा। इसमें वन्यजीव विशेषज्ञों, अनुभवी पशु चिकित्सकों, मैदानी अमले और सुरक्षा बलों की अहम भूमिका रही। दोनों राज्यों के वरिष्ठ वन अधिकारियों ने मौके पर रहकर पूरे अभियान की निगरानी की।
इस स्थानांतरण का मुख्य उद्देश्य बाघों की आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) को बढ़ाना है, ताकि रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में स्वस्थ और संतुलित टाइगर पॉपुलेशन विकसित हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र में बाघों का प्राकृतिक विस्तार होगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी कम होगी। वन विभाग के अधिकारियों ने इसे “टाइगर कंजर्वेशन मिशन” की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे वैज्ञानिक और योजनाबद्ध स्थानांतरण किए जाएंगे। यह अभियान न सिर्फ मध्य प्रदेश और राजस्थान, बल्कि पूरे देश के लिए वन्यजीव संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।