पानी पर संग्राम ! किसानों का चक्का जाम, डैम के पानी को लेकर दो गांव आमने-सामने
मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले से किसानों के आक्रोश की बड़ी खबर सामने आई है। माकड़ोन क्षेत्र में डैम के पानी के बंटवारे को लेकर चल रहा वर्षों पुराना विवाद उस वक्त उग्र हो गया, जब गुस्साए किसानों ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया। करीब तीन घंटे तक सड़क पर बैठे किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
दरअसल, उज्जैन जिले के माकड़ोन और डेलची गांव के किसानों के बीच पैतीसा डेम के पानी को लेकर पिछले करीब छह वर्षों से विवाद चल रहा है। आरोप है कि बीती रात डेलची गांव के कुछ किसानों ने माकड़ोन की ओर जा रही पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया। किसानों का कहना है कि रात के अंधेरे में उनकी मोटर उखाड़कर फेंक दी गई और कई पाइप तोड़ दिए गए, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
सुबह जब करीब 35 से अधिक किसानों की पाइपलाइन टूटी हुई मिली, तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते 200 से ज्यादा किसान माकड़ोन मंडी गेट के बाहर एकत्र हो गए और चक्का जाम कर दिया। किसानों के समर्थन में महिलाएं भी अपने घरेलू काम छोड़कर सड़क पर उतर आईं। सुबह 10 बजे शुरू हुआ यह जाम दोपहर करीब 1 बजे तक जारी रहा, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल निर्णायक दौर में है और सिंचाई के लिए पानी बेहद जरूरी है। डैम में पहले ही पानी की कमी है, ऐसे में पाइपलाइन तोड़े जाने से फसलें बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का आरोप है कि हर साल फसल पकने के समय इसी तरह की हरकतें की जाती हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
तहसीलदार नवीन कुंभकार ने बताया कि पाइपलाइन और मोटर तोड़फोड़ की घटना को गंभीरता से लिया गया है। पुलिस ने इस मामले में 15 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही है और दोनों गांवों के किसानों के बीच आपसी बैठक कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
राधेश्याम ग्रामीण ने बताया कि परमिशन होने के बावजूद बार-बार हमारी मोटर और पाइप तोड़े जाते हैं। इस बार 20 से 25 हजार रुपए तक का नुकसान हुआ है। फसल बर्बाद होने की कगार पर है।” फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन पानी के इस विवाद ने एक बार फिर प्रशासन और सरकार के सामने किसानों की गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि इस जल संघर्ष का स्थायी समाधान कब निकलता है।