आशिक संग भाग गई बेटी, प्रेम विवाह से टूटा परिवार, अब घर वालों ने आटे से पुतला बनाकर निकाली अर्थी
एक ऐसी भावुक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां एक परिवार ने अपनी जिंदा बेटी को ही मरा मान लिया और गाजे-बाजे के साथ उसका पुतला बनाकर अंतिम संस्कार कर दिया। मामला एमपी के विदिशा शहर की चूना वाली गली का है। यहां रहने वाले कुशवाह परिवार की 23 वर्षीय बेटी सविता 13 दिसंबर को अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने पहले रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद थक-हारकर परिजनों ने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई।
कुछ दिनों बाद परिजनों को जानकारी मिली कि सविता एक युवक के साथ घर छोड़कर चली गई है और उसने विवाह कर लिया है। यह खबर मिलते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मातम पसर गया। मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, वहीं पिता और भाई इस फैसले से पूरी तरह टूट गए। बेटी के इस फैसले को परिवार स्वीकार नहीं कर सका और इसके बाद जो हुआ, वह हर किसी को हैरान कर गया।
शुक्रवार को कुशवाह परिवार ने रिश्तेदारों को इकट्ठा किया। आटे से सविता का पुतला बनाया गया, अर्थी सजाई गई और गाजे-बाजे के साथ शहर के चौक-चौराहों से शव यात्रा निकाली गई। इसके बाद श्मशान घाट पहुंचकर पूरे विधि-विधान से पुतले का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों का कहना था कि वे अब सविता को अपने जीवन में मृत मान चुके हैं। रिश्तेदारों के अनुसार, सविता दो भाई और तीन बहनों में सबसे छोटी थी। वह ग्रेजुएशन कर चुकी थी। संजू मालवीय नाम का युवक उसके भाई का परिचित था और घर आना-जाना रहता था। इसी दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गए।
सविता के पिता रामबाबू कुशवाहा ने रोते हुए कहा- बेटी के फैसले से हम टूट चुके हैं। ये हमारे जीवन का सबसे दुखद क्षण है। राजेश कुशवाहा भाई ने बताया कि “बहन को बड़े अरमानों से पढ़ाया-लिखाया था। उसकी हर इच्छा पूरी की, लेकिन वह सब कुछ छोड़कर चली गई। आज हमने अपने अरमानों की अर्थी निकाली है।” यह घटना एक तरफ जहां परिवार की गहरी पीड़ा को दर्शाती है, वहीं समाज में प्रेम विवाह को लेकर मौजूद मानसिकता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। विदिशा की यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।