न्याय न मिलने से टूटा किसान, और फिर कलेक्ट्रेट गेट पर किये बड़े प्रयास, पुलिस की तत्परता से बची जा-न
प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते जब एक किसान को कहीं से न्याय की उम्मीद नहीं दिखी, तो उसने अपनी पीड़ा को कलेक्ट्रेट गेट पर आत्मघाती कदम में बदलने की कोशिश की। सागर संभाग के टीकमगढ़ जिले के जतारा विकासखंड के ग्राम कुराई निवासी किसान छत्ता अहिरवार ने मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे कलेक्ट्रेट कार्यालय के चैनल गेट पर तौलिया बांधकर बड़े प्रयास करने लगा। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की सूझबूझ और तत्परता से किसान की जान बचा ली गई। जानकारी के अनुसार किसान छत्ता अहिरवार की ग्राम कुराई स्थित जमीन को गांव के कुछ दबंगों ने पेंशन दिलाने का झांसा देकर अपनी पत्नी के नाम रजिस्ट्री करा ली। इतना ही नहीं, जमीन का नामांतरण भी करवा लिया गया। जब किसान को इस धोखाधड़ी की जानकारी लगी, तो उसने तहसीलदार, एसडीएम और जनसुनवाई में कई बार आवेदन दिए, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। लगातार उपेक्षा और जमीन पर कब्जे से परेशान होकर किसान मानसिक रूप से टूट गया।
न्याय की आखिरी उम्मीद लेकर किसान मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचा, लेकिन जब उसे फिर भी कोई राहत नहीं मिली, तो उसने कार्यालय गेट पर ही आत्मघाती कदम में बदलने की कोशिश की। गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत स्थिति को भांपते हुए किसान को बचा लिया। घटना की सूचना मिलते ही एसडीओपी राहुल कटरे मौके पर पहुंचे और किसान और उसके परिजनों को डिप्टी कलेक्टर से मिलवाया। किसान के पुत्र ने ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि उसके पिता की जमीन धोखे से हड़प ली गई है और बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
मामले पर अपर कलेक्टर शिवप्रसाद ने निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, वहीं सरपंच रहीस घोष ने भी किसान के साथ हुए अन्याय की पुष्टि की। पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समय रहते न्याय न मिले तो एक किसान किस हद तक मजबूर हो सकता है।