सीएम मोहन यादव का ऐतिहासिक संबोधन, 2 घंटे में जवाबों से विपक्ष निरुत्तर,विकास का विजन डाक्यूमेंट पेश
मध्य प्रदेश विधानसभा की स्थापना के 69 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र ने प्रदेश की राजनीति में नया अध्याय जोड़ दिया। लगभग 12 घंटे तक चले इस ऐतिहासिक सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का करीब दो घंटे का सशक्त और तथ्यपूर्ण संबोधन चर्चा का केंद्र रहा। सीएम के संबोधन के दौरान सदन में ऐसा माहौल बना कि विपक्ष के तमाम सवालों के जवाब एक-एक कर सामने आते गए और विपक्ष बैकफुट पर नजर आया। सत्र की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास का प्रस्ताव रखा और इसके बाद सदन के पटल पर अपना विजन डाक्यूमेंट प्रस्तुत किया। इस दस्तावेज में मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य की पुरानी छवि से बाहर निकालकर विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने की स्पष्ट रूपरेखा रखी गई। सीएम मोहन यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सरकार की प्रमुख उपलब्धियों को विस्तार से गिनाया। उन्होंने कर्जमुक्त नई बसों के संचालन, किसानों के हित में भावांतर योजना, सिंचाई क्षेत्रफल में अभूतपूर्व वृद्धि, पर्यटन क्षेत्र में रिकॉर्ड तोड़ प्रगति, चीता परियोजना सहित वन्यजीव संरक्षण, युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों, और लाड़ली बहना योजना की राशि में बढ़ोतरी जैसे अहम निर्णयों का उल्लेख किया। उनका बेबाक अंदाज और आत्मविश्वास सदन में साफ झलक रहा था। इस विशेष सत्र की सबसे अहम और सराहनीय घोषणा रही—किसानों के मुद्दों पर अलग से विशेष सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव। मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष के सदस्यों ने भी सहमति जताई और इसे सकारात्मक कदम बताया।
सीएम मोहन यादव का यह संबोधन केवल सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा नहीं था, बल्कि भविष्य का रोडमैप भी था। सदन में जब मुख्यमंत्री बोले, तो विपक्ष खामोश नजर आया। पूरे सत्र के दौरान यह साफ दिखा कि सीएम फ्रंटफुट पर रहे और विपक्ष बैकफुट पर। यह विशेष सत्र न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का प्रतीक बना, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि सकारात्मक सोच, संवाद और स्पष्ट विजन के साथ मध्य प्रदेश विकास के नए शिखर छूने के लिए तैयार है।