सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना निरस्त, उज्जैन में किसानों की जीत, आतिशबाजी कर मनाई खुशी
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उज्जैन में प्रस्तावित सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना को निरस्त किए जाने के बाद किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से इस योजना का विरोध कर रहे किसानों ने फैसले का स्वागत करते हुए आतिशबाजी कर अपनी प्रसन्नता जाहिर की और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।
सरकार द्वारा आगामी सिंहस्थ महापर्व के आयोजन को लेकर उज्जैन में लैंड पुलिंग योजना लागू करने की तैयारी की जा रही थी। इस योजना के तहत किसानों की जमीन को लेकर कई आशंकाएं सामने आ रही थीं। भारतीय किसान संघ लगातार इस योजना का विरोध कर रहा था और किसानों का कहना था कि इससे उनकी भूमि और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसी को लेकर भारतीय किसान संघ ने 26 दिसंबर को कोठी पैलेस स्थित कलेक्टर कार्यालय पर “डेरा डालो-घेरा डालो” आंदोलन की चेतावनी भी दी थी।
हालांकि, आंदोलन से पहले ही सरकार ने किसान नेताओं से संवाद स्थापित किया और उनकी आपत्तियों को गंभीरता से सुना। बातचीत के बाद राज्य सरकार ने सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना को निरस्त करने का निर्णय लिया। जैसे ही यह खबर किसानों तक पहुंची, उज्जैन में उत्साह का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में किसान भारतीय किसान संघ कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने मिठाइयां बांटी और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया।
भारतीय किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल आंजना ने कहा कि सरकार का यह निर्णय किसानों के हित में है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का धन्यवाद देते हुए कहा कि किसानों की भावनाओं को समझते हुए यह बड़ा फैसला लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना भले ही निरस्त हो गई हो, लेकिन सिंहस्थ से जुड़े कुछ अन्य मुद्दों और कमियों को लेकर सरकार से चर्चा अभी जारी है।
किसानों का कहना है कि यह फैसला सरकार और किसान संगठनों के बीच संवाद की जीत है। उनका मानना है कि यदि इसी तरह बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान होता रहा, तो भविष्य में भी टकराव की स्थिति नहीं बनेगी।
फिलहाल, लैंड पुलिंग योजना के निरस्त होने से उज्जैन के किसानों ने राहत की सांस ली है और पूरे क्षेत्र में संतोष और उत्साह का माहौल नजर आ रहा है।