शासकीय महाविद्यालय में शिक्षा व्यवस्था फेल! खाली क्लासरूम, नदारद शिक्षक और भटकते छात्र
सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के दावों के बीच एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के शासकीय महाविद्यालय बकस्वाहा की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। यहां पढ़ाई के नाम पर सन्नाटा पसरा है, कक्षाएं खाली हैं और छात्र-छात्राएं भविष्य को लेकर असमंजस में भटकते नजर आ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि दोपहर 12 बजे तक मुश्किल से दो-तीन कक्षाएं ही संचालित हो पाती हैं, उसके बाद पूरा कॉलेज वीरान दिखाई देता है। जानकारी के अनुसार महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापकों के कुल 11 पद स्वीकृत हैं, लेकिन नियमित रूप से केवल 3 से 4 शिक्षक ही कॉलेज पहुंच रहे हैं। अधिकांश शिक्षक या तो अवकाश पर रहते हैं या बिना सूचना के अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कॉलेज की प्राचार्य तक मौजूद नहीं मिलीं, जिससे प्रशासनिक लापरवाही की गंभीरता और उजागर हो गई।
सबसे ज्यादा परेशानी बीए फाइनल के विद्यार्थियों को हो रही है। छात्रों का कहना है कि उनके विषयों के प्राध्यापक महीनों से कक्षाएं नहीं ले रहे हैं। केवल राजनीति शास्त्र की कक्षा कभी-कभार लग जाती है, जबकि अन्य विषयों की पढ़ाई पूरी तरह ठप है। विद्यार्थियों के अनुसार सप्ताह में केवल दो दिन औपचारिक कक्षाएं लगती हैं और कई बार तो पूरे महीने में सिर्फ दो-तीन दिन ही पढ़ाई हो पाती है। इस अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने पर छात्रों को दबाने के आरोप भी सामने आए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर अध्यक्ष राहुल प्रजापति ने आरोप लगाया कि जो छात्र शिक्षण व्यवस्था की शिकायत करते हैं या मीडिया के सामने बोलते हैं, उन्हें धमकाया जाता है। इससे छात्रों में डर का माहौल बन गया है और वे खुलकर अपनी समस्या रखने से कतरा रहे हैं।
वहीं कॉलेज प्राचार्य पुष्पा सामवेद का कहना है कि वे स्वास्थ्य कारणों से अवकाश पर थीं और कुछ शिक्षक भी छुट्टी या शासकीय कार्य में व्यस्त हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल आश्वासन से कॉलेज की बदहाल शिक्षण व्यवस्था सुधरेगी, या छात्रों का भविष्य यूं ही अधर में लटका रहेगा? अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।