Sagar-पीएम उषा परियोजना के तहत सागर में पद्मश्री पांडे ने दिया खेत में मेड़, मेड़ में पेड़ का संदेश
बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य और बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच सतत विकास की दिशा में सार्थक पहल करते हुए सागर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में पीएम उषा परियोजना के अंतर्गत “पर्यावरणीय चुनौतियां और सतत विकास” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में सागर विधायक शैलेंद्र जैन उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने की। विषय प्रवक्ता के रूप में पद्मश्री सम्मानित पर्यावरणविद उमाशंकर पांडे ने अपने प्रेरक विचारों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पद्मश्री उमाशंकर पांडे ने “खेत में मेड़ और मेड़ में पेड़” की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक किसान अपनी मेड़ पर पेड़ लगाए, तो न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि मिट्टी संरक्षण, जल संचयन और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। यह मॉडल पर्यावरण और कृषि—दोनों के लिए लाभकारी है। विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल विषय नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अभी से ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने ऐसे आयोजनों को समाज में जागरूकता फैलाने वाला बताया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने कहा कि सतत विकास का मार्ग तभी संभव है, जब शिक्षा, शोध और सामाजिक सहभागिता एक साथ आगे बढ़ें। महाविद्यालयों की भूमिका इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वागत भाषण देते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और अपने पूर्वजों के मूल्यों को अपनाना चाहिए, क्योंकि “प्रकृति का संरक्षण ही वास्तविक विकास है।” इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शोधार्थी और महाविद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा। विशेषज्ञों के विचारों और सुझावों ने सभी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता से सोचने और कार्य करने के लिए प्रेरित किया।