एनआरसी में पोषण का संकट, 10 बेड भरे, लेकिन रसोई खाली, जांच में उजागर हुई चौंकाने वाली हकीकत
सरकारी योजनाओं के जरिए कुपोषण पर प्रहार और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार के बड़े-बड़े दावों के बीच पाली स्थित न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी) की जमीनी हकीकत सामने आकर सिस्टम को आईना दिखा रही है। यहां न तो प्रसूताओं को नियमित भोजन मिल पा रहा है और न ही कुपोषित बच्चों के लिए आवश्यक पोषणयुक्त आहार—जबकि शासन ने इसके लिए अलग बजट और स्पष्ट दिशा-निर्देश तय कर रखे हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एमपी के उमरिया जिले के पाली एसडीएम ने तत्काल जांच के आदेश दिए। तहसीलदार संतोष चौधरी जब एनआरसी केंद्र पहुंचे, तो हालात चौंकाने वाले निकले। केंद्र की स्वीकृत क्षमता 10 बेड की है और जांच के समय सभी 10 बेड भरे हुए थे, लेकिन रसोई की स्थिति बेहद दयनीय पाई गई। खाने के नाम पर पूरे केंद्र में सिर्फ 1 किलो चावल, लगभग डेढ़ किलो आटा और महज 3 पैकेट दलिया मौजूद थे। न हरी सब्जी, न फल, न ही कोई अतिरिक्त पौष्टिक सामग्री—जबकि यहां भर्ती महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक पोषण की जरूरत वाले वर्ग में आते हैं।
जांच के दौरान एक और गंभीर खुलासा हुआ। केंद्र के कर्मचारियों ने खुद स्वीकार किया कि पिछले करीब चार महीनों से दूध की आपूर्ति पूरी तरह बंद है। यह एनआरसी संचालन मानकों का सीधा उल्लंघन है और कुपोषण उन्मूलन की सरकारी मंशा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। तहसीलदार संतोष चौधरी ने बताया कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर प्रतिवेदन एसडीएम को सौंप दिया गया है और आगे की कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय होगी। गौरतलब है कि एनआरसी केंद्रों का उद्देश्य कुपोषित बच्चों को नई जिंदगी देना और प्रसूताओं को सुरक्षित, पोषणयुक्त देखभाल प्रदान करना है। लेकिन पाली एनआरसी की यह स्थिति बताती है कि योजनाएं कागजों पर जितनी मजबूत हैं, ज़मीन पर उतनी ही कमजोर। अब सबकी निगाहें एसडीएम की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं—ताकि जिम्मेदारों पर सख्ती हो और शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच सके।