आदिवासी छात्रों का पैदल मार्च, आश्रम अधीक्षक पर बड़े आरोप, कलेक्टर तक पहुंचाने निकले बच्चे
एमपी के बड़वानी जिले के सिलावद से प्रशासन और शिक्षा विभाग को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित आदिवासी बालक आश्रम के 50 से अधिक छात्रों ने छात्रावास प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए अपनी आवाज सीधे कलेक्टर तक पहुंचाने का फैसला किया है। छात्रों का आरोप है कि आश्रम अधीक्षक द्वारा लगातार मानसिक उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी आक्रोश के चलते आश्रम में पढ़ने वाले दर्जनों छात्र पैदल ही बड़वानी जिला मुख्यालय की ओर रवाना हो गए। छात्रों के इस पैदल मार्च की खबर मिलते ही शिक्षा विभाग, आदिवासी विकास विभाग और प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। रास्ते में अधिकारियों ने छात्रों को रोकने और समझाने की कोशिश की, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी शिकायतों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं होगी, वे पीछे नहीं हटेंगे।
छात्रों का आरोप है कि आश्रम अधीक्षक सायराम नरगावे द्वारा आए दिन गाली-गलौज की जाती है और कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग भी किया जाता है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें डराया-धमकाया जाता है और कई बार जान से मारने की धमकी तक दी गई है। छात्रों का कहना है कि इस माहौल में पढ़ाई करना तो दूर, आश्रम में रहना भी मुश्किल हो गया है। पैदल यात्रा में छात्रों के साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से तत्काल जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। एबीवीपी का कहना है कि यदि आदिवासी छात्रों के साथ हो रहे अन्याय को अनदेखा किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
वहीं, मामले में छात्रावास अधीक्षक ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए सफाई दी है। उनका कहना है कि छात्रों पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। फिलहाल, यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सवाल यह है कि क्या आदिवासी छात्रों की आवाज इस बार सुनी जाएगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। सभी की निगाहें अब कलेक्टर और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।