शहादत को सलाम, बदेलनखेरा में गूँजा कमलेंद्र यादव अमर रहे, स्मारक निर्माण की उठी जोरदार मांग
मध्य प्रदेश के सागर संभाग के छतरपुर जिले के नगर भगवां क्षेत्र के बदेलनखेरा गांव में बुधवार की रात एक ऐसा पल आया जब पूरा गांव वीरता, त्याग और दर्द की एक ही धड़कन पर जैसे थम गया। शाम के ठीक 8 बजे, दीपों की रोशनी के बीच गांव की हवा में शहीद आरक्षक कमलेंद्र यादव का नाम गूंज उठा। यह सिर्फ श्रद्धांजलि सभा नहीं थी—यह एक बेटे, एक भाई, और गांव के प्रहरी को दिलों में फिर से जीवित करने का संकल्प था। चार वर्ष पहले ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना में शहीद हुए आरक्षक कमलेंद्र यादव आज भी गांव के हर बुज़ुर्ग की दुआ, हर बच्चे की प्रेरणा और पूरे यादव समाज की शान बने हुए हैं।
उनकी ईमानदारी, बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को याद करते हुए गांव में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कई आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित किए, दीप जलाए और मंच से जब कमलेंद्र के साहस की कहानियाँ सुनाई गईं तो ऐसा लगा मानो वे वर्दी में मुस्कुराते हुए आज भी वहीं खड़े हों। सभा में पुलिस प्रशासन, पत्रकार, सामाजिक संगठन और सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। हर किसी ने एक ही संदेश दिया—कमलेंद्र सिर्फ नाम नहीं, पूरे गांव की पहचान हैं।
लेकिन इस भावुक माहौल के बीच एक कड़वी सच्चाई ने सबको झकझोर दिया—शहीद स्मारक का अधूरा वादा। परिजनों ने कहा कि वर्षों पहले कमलेंद्र के नाम पर स्मारक बनाने की घोषणा हुई थी, पर आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीण भी गुस्से में बोले— “जो बेटा देश के लिए जान दे सकता है, उसके नाम पर एक स्मारक बनाना हमारी ज़िम्मेदारी है।” सभा में यह आवाज़ जब उठी तो पूरा माहौल गूंज उठा। बदलनखेरा में बीती रात केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं था—यह प्रण था। “कमलेंद्र की कुर्बानी नहीं भूली जाएगी… जब तक स्मारक नहीं बनेगा, आवाज़ उठती रहेगी।” यादों में अमर… आत्मा में अमिट… शहीद आरक्षक कमलेंद्र यादव — गांव की शान, समाज का गर्व।