सागर मंडी में मक्का की बंपर आवक, दाम में बड़ी गिरावट, किसानों की मेहनत पर पानी! |SAGAR TV NEWS|
सागर कृषि उपज मंडी में इन दिनों मक्का की अच्छी आवक हो रही है। अक्टूबर-नवंबर में अब तक 2 लाख 22 हजार 666 क्विंटल मक्का की बिक्री हो चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि से काफी अधिक है। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन कम भाव मिलने से उनका चेहरा उतरा हुआ है। इस साल मक्का 1300 से 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक ही बिक रहा है, जबकि पिछले साल यही मक्का 2200 से 2300 रुपए क्विंटल तक बिका था। करीब 700 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट से किसानों को लागत भी नहीं निकल पा रही है। किसानों का कहना है कि इस बार मक्का का रकबा बढ़ा है और उत्पादन भी अच्छा हुआ है। एक एकड़ में औसतन 20 से 25 क्विंटल तक पैदावार हुई है, लेकिन दाम इतने कम हैं कि खेती घाटे का सौदा बन गई है।
मंडी पहुंचे देवलचौरी के दीपक तिवारी ने बताया कि एक एकड़ मक्का की खेती में 15 से 20 हजार रुपए तक खर्च आता है। किसान खेतों में 400-500 रुपए किलो वाला हाइब्रिड बीज लगाते है। एक एकड़ में 6 किलो बीज लगता है। खाद, दवा, कटाई-मड़ाई, थ्रेसर और परिवहन मिलाकर कुल लागत 18 से 20 हजार रुपए प्रति एकड़ बैठती है। यदि अच्छी उपज होती है तो अधिकतम 15 क्विंटल उत्पादन भी मान लें तो 1600 रुपए के भाव से भी मात्र 22 हजार रुपए की आय होती है। जिसमें से 20 हजार रुपये लागत निकालने के बाद किसानों को कुछ बचत नहीं हो पाती।
भापेल गांव से आए किसान पप्पू ठाकुर ने बताया कि उन्होंने 130 एकड जमीन ठेके से ली थी। पूरे रकबे में मक्का लगाई। बारिश के कारण उपज प्रभावित हुई लेकिन कुल मिलाकर ठीक-ठाक उपज हुई। लेकिन दाम अच्छे न मिलने के कारण नुकसान हो रहा है। किसानों ने मांग की है कि कम से कम 2000 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।
व्यापारियों का तर्क है कि इस बार मक्का की फसल में नमी अधिक होने से गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिसके कारण ऊंचे दाम नहीं लग पा रहे। हालांकि किसान इसे पूरी तरह खारिज करते हैं और कहते हैं कि नमी की मात्रा सामान्य सीमा में ही है। मंडी परिसर में दिनभर किसानों की भीड़ और उनके चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही है। किसान मांग कर रहे है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप कर किसानों को राहत दे।