सागर- श्री गुलाब बाबा मंदिर उत्सव का समापन: विशाल महाप्रसादी में हजारों भक्तों ने पाया आशीर्वाद
सागर- श्री गुलाब बाबा मंदिर उत्सव का समापन: विशाल महाप्रसादी में हजारों भक्तों ने पाया आशीर्वाद
सुबह 11:32 से रात 9:32 बजे तक चला भंडारा, बुंदेलखंड की 40 भजन मंडलियों ने दी प्रस्तुतियां
सागर/निप्र — “संत कृपा कछु दुर्लभ नाहीं…” इसी संत वाणी के साथ मंगलवार को श्री गुलाब बाबा मंदिर सागर के 18वें वार्षिक उत्सव का समापन भव्य महाप्रसादी (भंडारे) के साथ हुआ। सुबह 11:32 से रात 9:32 बजे तक चले इस आयोजन में हजारों भक्तों ने श्री गुलाब अन्नपूर्णा भवन में बैठकर प्रसादी ग्रहण की।
मराठी पद्धति की प्रसादी, बड़े तवे पर बनी रोटियां
भंडारे में मराठी शैली से लकड़ी के चूल्हों पर तैयार रोटियां, चावल, दाल-भाजी, सब्जी और मीठा परोसा गया। इसके लिए मालेगांव (महाराष्ट्र) से आए लगभग 50 पुरुष एवं महिला सेवकों के साथ सागर और आसपास के भक्तों ने भी सेवा दी।
भंडारा वितरण में सागर, बटियागढ़, नरसिंहगढ़, जबेरा से आई मातृशक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जूता-चप्पल (चरण पादुका) सेवा भी मंदिर भक्तों द्वारा पूरी निष्ठा से निभाई गई।
40 भजन मंडलियों ने सजाई भक्ति की महफिल
दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक ‘बुंदेली लोकरंग उत्सव’ के तहत बुंदेलखंड की 40 भजन मंडलियों ने श्री गुलाब मंच पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। सभी मंडलियों को महेंद्र सोनी और आयोजन समिति के अन्य सदस्यों ने सम्मानित किया।
पादुका सेवा और कार्यालय व्यवस्था में स्थानीय भक्तों, चिकित्सकों और स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा।
राधे-राधे संकीर्तन और बुंदेली प्रस्तुतियों ने बांधा समां
रात्रि 8 बजे से लक्ष्मीपुरा स्थित श्री गोपालजी मंदिर के हरिकृष्ण यादव बंधुओं ने राधे-राधे संकीर्तन प्रस्तुत किया। इसके बाद विजय ठाकुर पडरिया ने अपने प्रसिद्ध बुंदेली अंदाज में भक्तों को खूब झूमाया।
चरण पादुका पालकी का मंदिर प्रवेश, आतिशबाजी के साथ समापन
रात 12 बजे गुलाब पीठ पर विराजमान चरण पादुका पालकी को भक्त नाचते-गाते मंदिर लाए। गर्भगृह में पालकी प्रतिष्ठा के बाद ट्रस्ट सदस्यों ने आरती की। इसके पश्चात भव्य आतिशबाजी, ढोल-नगाड़ों की धुनों पर नृत्य और प्रसादी वितरण के साथ उत्सव का समापन हुआ।
आयोजन में मुंबई, सागर और आसपास के क्षेत्रों से आए अनेक सेवकों, कलाकारों और समाजसेवियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।