Sagar - स्मार्ट सिटी की दीवार पर खुली पोल ! स्मार्ट टॉयलेट बंद, लोग मजबूर सड़क किनारे पेशाब करने
सागर भले ही स्मार्ट सिटी का दर्जा पा चुका हो, करोड़ों की योजनाएँ स्वीकृत हो चुकी हों और शहर को स्मार्ट बनाने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी सच्चाई इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। इसका ताज़ा और शर्मसार कर देने वाला उदाहरण मंगलवार की शाम कलेक्ट्रेट परिसर में सामने आया, जहां स्मार्ट सिटी कार्यालय की दीवार के पास एक युवक खुलेआम पेशाब करता कैमरे में कैद हो गया। घटना शाम 5 बजे के करीब की है।
जब युवक से पूछा गया कि वह स्मार्ट सिटी कार्यालय की दीवार पर पेशाब क्यों कर रहा है, तो उसका जवाब सुनकर प्रशासन के दावों की असलियत खुलकर सामने आ गई। युवक बोला—“यहां सब पेशाब करते हैं… सफाई कहां होती है? स्मार्ट सिटी हो या नहीं, शहर में गंदगी ही गंदगी है।
युवक की इस एक लाइन ने यह साफ कर दिया कि शहर में बने स्मार्ट टॉयलेट सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं। कई टॉयलेटों पर ताले लटके हुए हैं, कई जगह पानी नहीं है, और कई तो शुरुआत से ही चालू ही नहीं हुए। सबसे हैरानी की बात यह कि स्मार्ट सिटी कार्यालय के बाहर भी कोई कार्यशील सार्वजनिक शौचालय नहीं है—जो सीधे तौर पर बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है।
लोगों का कहना है कि शहर में करोड़ों की लागत से टॉयलेट तो बना दिए गए, लेकिन न तो उनकी देखरेख की गई, न साफ-सफाई, और न ही जनता तक जागरूकता अभियान पहुंचाए गए। ऐसे में लोग मजबूर होकर सड़कों, दीवारों और सार्वजनिक जगहों पर पेशाब कर रहे हैं। यह हाल उस शहर का है जिसे स्मार्ट सिटी कहा जाता है। उस कार्यालय की दीवार भी सुरक्षित नहीं, जो शहर को स्मार्ट बनाने का दावा करता है।
अब बड़ा सवाल—जब स्मार्ट सिटी का अपना कार्यालय ही साफ-सफाई और टॉयलेट सुविधा से महरूम है, तो पूरे शहर का क्या हाल होगा? फिलहाल अधिकारी इस मामले पर मौन हैं। ज़रूरत है कि स्मार्ट सिटी प्रबंधन केवल निर्माण नहीं, बल्कि संचालन, सफाई और जागरूकता पर भी गंभीरता से ध्यान दे—ताकि ‘स्मार्ट सिटी’ सिर्फ नाम नहीं, व्यवहार में भी स्मार्ट बन सके।