सिंहस्थ से पहले साधु–संतों में बवाल ! शैव अखाड़ों ने वैष्णव अखाड़े से नाता तोड़ा, रामा दल अखाड़ा परिषद का गठन
सिंहस्थ 2028 से पहले ही साधु-संतों के बीच गहरी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। उज्जैन में आज हुई अहम बैठक में शैव अखाड़ों ने वैष्णव अखाड़े से अपना संबंध तोड़ने का ऐतिहासिक निर्णय ले लिया। इसके साथ ही नया रामा दल अखाड़ा परिषद गठित कर दिया गया है, जिसने धार्मिक और अखाड़ा व्यवस्था में नई हलचल ला दी है।
अखाड़ा परिषद को भंग किए जाने का विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आज खाक चौक स्थित रामानंदीय निर्मोही अखाड़े में शैव परंपरा से जुड़े अखाड़ों की बड़ी बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनी अखाड़ों के प्रमुख साधु-संत मौजूद रहे। लंबी चर्चा के बाद स्थानीय अखाड़ा परिषद को पूरी तरह भंग कर दिया गया और वैष्णव अखाड़े से अलग होने का ऐलान कर दिया गया।
इसके बाद सर्वानुमति से नए संगठन रामा दल अखाड़ा परिषद का गठन किया गया। नए परिषद में पदाधिकारियों की नियुक्ति भी तुरंत कर दी गई। डॉक्टर रामेश्वर दास महाराज को अध्यक्ष चुना गया, जबकि अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी संतों को जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक में नव-निर्वाचित पदाधिकारियों का स्वागत कर उन्हें नई दिशा में काम करने का संकल्प दिलाया गया। मीडिया से बातचीत में डॉ. रामेश्वर दास और महंत भगवान दास ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अस्तित्व पर ही गंभीर सवाल उठाए।
दोनों ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान अखाड़ा व्यवस्था साधु-संतों की भावना के अनुरूप नहीं चल रही है, इसलिए नया ढांचा खड़ा करना जरूरी हो गया था। जब इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया जानने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी महाराज से बात की गई तो उन्होंने किसी भी तरह के विवाद से इंकार किया। उनका कहना था— “हमारा किसी से कोई मनमुटाव नहीं है, और मैं इस विवाद पर कुछ नहीं कहना चाहता।