सागर- डिजिटल हिं-सा पर बड़ा मंथन, गौर विश्वविद्यालय में जागरूकता सेमिनार, सोशल मीडिया सुरक्षा पर जोर
सागर के डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन विभाग में शुक्रवार सुबह एक महत्वपूर्ण और बेहद प्रासंगिक विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया—“महिलाओं के खिलाफ डिजिटल हिंसा”। सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले अपराधों के मद्देनज़र यह कार्यक्रम समय की मांग भी था और बेहद जरूरी पहल भी। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे मां सरस्वती और डॉ. हरिसिंह गौर के चित्र के समक्ष कुलपति प्रो. वाय एस ठाकुर, विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीत वालिया तथा सभी आमंत्रित चिकित्सकों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। सरस्वती वंदना के बाद पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया।
सेमिनार का संचालन समिति की सचिव डॉ. निधि जैन ने किया, जिन्होंने अपने प्रभावी संबोधन में डिजिटल हिंसा के बढ़ते परिदृश्य, साइबर अपराधों के नए रूपों और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से होने वाले गंभीर मानसिक व सामाजिक प्रभावों पर रोशनी डाली। कार्यक्रम में डॉ. ज्योति चौहान ने डिजिटल हिंसा के अलग-अलग रूपों—साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन हैरेसमेंट, फेक प्रोफाइल, फोटो मॉर्फिंग, डेटा मिसयूज, ट्रोलिंग—पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि डिजिटल मंचों पर बढ़ती निर्भरता के कारण यह समस्या अब पहले से कहीं अधिक गंभीर होती जा रही है। उन्होंने युवाओं, खासकर महिलाओं को ऑनलाइन सुरक्षित रहने, सतर्कता बरतने और डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
इसके बाद कार्यक्रम की आयोजक डॉ. प्रेरणा जैन ने कुलपति प्रो. ठाकुर सहित सभी अतिथि डॉक्टरों का पुष्पगुच्छ से सम्मान किया और कहा कि इस तरह के सेमिनार समाज में साइबर जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। सहभागी छात्रों ने भी डिजिटल सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों से सवाल पूछे और प्रायोगिक जानकारी हासिल की। सेमिनार का मुख्य संदेश साफ रहा, “डिजिटल दुनिया में सक्रिय रहना जितना आसान है, उतना ही जरूरी है सतर्क रहना। डिजिटल हिंसा को पहचानना, रोकना और रिपोर्ट करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।” कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने सभी को साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करने और सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की।