400 साल पुरानी परंपरा ! ओरछा में राजा राम की भव्य राजसी बारात जनकपुरी के लिए रवाना
एमपी के निवाड़ी जिले की धार्मिक, पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहर—ओरछा। जिसे बुंदेलखंड की अयोध्या भी कहा जाता है। आज विवाह पंचमी के पावन अवसर पर यहां की सदियों पुरानी और अद्भुत मान्यता जीवंत हुई। राजा राम की बारात राजसी शान-ओ-शौकत के साथ नगर से निकलकर जनकपुरी के लिए रवाना हुई। यह नजारा इतना अद्भुत था कि देश-दुनिया से आए सैलानी भी मंत्रमुग्ध रह गए। करीब चार शताब्दियों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन आज भी उसी श्रद्धा और वैभव के साथ किया जाता है।
मंदिर परिसर से जैसे ही दूल्हा बने राजा राम सरकार बाहर निकले, पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद भगवान राम और लक्ष्मण पालकी में विराजमान होकर पूरे नगर का भ्रमण करते हुए जनकपुरी की ओर रवाना हुए। पालकी के दर्शन मात्र से भक्त भाव-विभोर दिखाई दिए। हर मोड़ पर श्रद्धालुओं ने आरती उतारी, टीका किया और पुष्पवर्षा से भगवान का स्वागत किया।
पूरे ओरछा नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया। भव्य लाइटिंग, सजे गलियारे, जगमगाते मोमेंट्स और रंग-बिरंगी झांकियों ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया। राम की बारात में बुंदेली संगीत, ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर भक्त जमकर थिरकते नजर आए। बुंदेलखंड ही नहीं, देश के अलग-अलग राज्यों के पर्यटक और विदेशी सैलानी भी इस राजसी बारात का हिस्सा बने और इसे अविस्मरणीय बताया। रात 12 बजे बारात जनकपुरी पहुंची, जहां दूल्हा सरकार राम का परंपरागत टीका हुआ।
इसके बाद सभी विवाह रस्में बुंदेली रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न की गईं। कार्यक्रम में निवाड़ी कलेक्टर जमुना भिड़े, पुलिस अधीक्षक राय सिंह नरवरिया, विधायक अनिल जैन समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे। राजा राम की यह बारात सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ओरछा की सांस्कृतिक पहचान है—जो हर वर्ष इतिहास, परंपरा और आस्था को एक साथ जीवंत करती है।