Sagar - इस बार भी 2600 रुपए क्विंटल में गेहूं खरीदेगी सरकार, सागर में मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान
मध्यप्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी पिछले साल की तरह ही होगी। अब तक इस पर सस्पेंस बना हुआ था, क्योंकि 72 हजार करोड़ रुपए के कर्ज के चलते प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से ही सीधे तौर पर गेहूं खरीदी करने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने ही इसको लेकर केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखा था। इसके चलते न सिर्फ राजनीति गरमाई थी बल्कि किसान भी चिंतित थे। रविवार को सागर जिले के बंडा में सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- गेहूं पिछले साल भी खरीदा था। इस साल 2600 रुपए क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे।
हमारी सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा अभी जब सोयाबीन के भावांतर की बात आई तो कांग्रेसी कहते, हाय रे, हाय रे, कहां से लाओगे? कहां हैं सोयाबीन के पैसे? हमने कहा चिंता मत करो। धीरे-धीरे करके भाव भी बढ़ा रहे और भावांतर का पैसा भी दे रहे हैं। भावांतर के माध्यम से 5328 रुपए क्विंटल सोयाबीन का किसानों को दे रहे हैं। धान का बोनस भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा लाड़ली बहना योजना हमने 1000 रुपए से शुरू की। इसी साल से 1500 रु. देना शुरू किए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि ये कहीस खुद भी डूबेगी दूसरों को भी डुबो देगी।
किसानों से भारतीय खाद्य निगम खरीदारी करता। इसमें गुणवत्ता के नियम सख्त होते हैं। किसानों को समस्या होती। यदि गीला, मिट्टी होने आदि की वजह गेहूं रिजेक्ट हो जाता तो किसानों को खुले बाजार में बेचना पड़ता। ऐसे में एमएसपी से कम पर बिक्री होने से किसानों को नुकसान भी होता हैं
किसानों से नागरिक आपूर्ति निगम खरीदारी करेगा। खरीदी केंद्रों पर किसानों के प्रति रवैया नरम होता है। खराब अनाज भी खरीदा जाता है। शिकायत पर सुनवाई भी होती है। सोयबीन की कम उपज और सस्ते दामों पर मक्का की बिक्री से टूटे किसानों को यह व्यवस्था फायदेमंद रहेगी। ऐसा होने पर वे बुरी तरह टूट सकते थे।