सागर-विवेक और सहजता से ही आती है भक्ति — श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस इन्द्रेश उपाध्याय जी का संदेश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअली जुड़े, सागरवासियों को दूसरी बार मिला दिव्य सान्निध्य
सागर-विवेक और सहजता से ही आती है भक्ति — श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस इन्द्रेश उपाध्याय जी का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअली जुड़े, सागरवासियों को दूसरी बार मिला दिव्य सान्निध्य
सागर में धर्म श्री अंबेडकर वार्ड स्थित श्री सिद्ध क्षेत्र बालाजी मंदिर प्रांगण में जारी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास परम पूज्य पं. इन्द्रेश उपाध्याय जी महाराज ने भक्तिभाव से परिपूर्ण प्रवचन दिया। मुख्य यजमान श्रीमती अनुश्री शैलेन्द्र कुमार जैन और विधायक सागर श्री शैलेन्द्र कुमार जैन द्वारा आयोजित इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
“संग्रह बढ़े तो भगवान दूर, सेवा बढ़े तो भगवान पास”
महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य के भीतर यदि संग्रह की वृत्ति बढ़ती जाए तो समझना चाहिए कि ठाकुर जी उससे दूर चले गए हैं। लेकिन जब मन में सेवा, दान और अर्पण की भावना जागृत होने लगे, तो यह भगवान के समीप आने का संकेत है।
उन्होंने कहा— “ज्ञान जब पच जाता है, तब व्यक्ति विवेकी और मौन हो जाता है। अधिक बोलना और अधिक खाना — दोनों ही आयु घटाते हैं, इसलिए संयम आवश्यक है।”
नन्द बाबा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब भगवान घर आते हैं, तो लोभ और मोह अपने आप छूट जाते हैं।
“आध्यात्मिकता रूप में नहीं, विचारों में होती है”
पं. इन्द्रेश उपाध्याय जी ने कहा कि आध्यात्मिक व्यक्ति का मूल्यांकन उसके विचारों, भावों और स्वभाव से होता है, न कि रूप और वर्ण से। उन्होंने समझाया कि जब मनुष्य कुछ प्राप्त कर लेता है तो सहजता खो देता है और वहीं से पतन शुरू होता है।
वृंदावन की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा— “वृंदावन को न ब्रह्मा ने बनाया, न विश्वकर्मा ने… उसे स्वयं किशोरी जी ने रचा है।”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कथा में सहभागिता की। उन्होंने कहा— “सनातन संस्कृति की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, राष्ट्र उतना ही समृद्ध होगा।” मुख्यमंत्री ने आयोजकों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं।
अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास पं. इन्द्रेश उपाध्याय जी — एक संक्षिप्त परिचय
जन्म : 7 अगस्त 1996 — श्रीधाम वृंदावन
पिता : पूज्य श्री कृष्णचंद्र शास्त्री
संस्था : भक्तिपथ — संस्थापक
पं. इन्द्रेश उपाध्याय जी देश–विदेश में विख्यात युवा आध्यात्मिक व्यास हैं। मात्र 13 वर्ष की आयु में श्रीमद्भागवत महापुराण का संपूर्ण अध्ययन एवं कंठस्थ कर लिया। उनके प्रवचन भक्ति, ज्ञान और विनम्रता के अनूठे संगम के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी संस्था भक्तिपथ सनातन धर्म की शिक्षाओं को विशेष रूप से युवाओं तक पहुँचाने का कार्य कर रही है।
भक्तों ने कहा — “भजनों और प्रवचनों से वातावरण दिव्य हो जाता है”
कथास्थल पर उपस्थित भक्तों ने बताया कि महाराज श्री के भजनों और उपदेशों से वातावरण में दिव्य आनंद और सकारात्मक ऊर्जा फैल जाती है।
सागर का सौभाग्य — 10 माह में दूसरी बार दिव्य दर्शन
लगभग 10 माह के भीतर सागरवासी दूसरी बार पं. इन्द्रेश उपाध्याय जी का सान्निध्य पा रहे हैं। भक्तजनों ने इस भव्य आयोजन के लिए मुख्य यजमान श्रीमती अनुश्री जैन और विधायक शैलेन्द्र जैन का आभार व्यक्त किया।
गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ, विधायक प्रदीप लारिया, विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, सुनील देव, गौरव सिरोठिया, सुधीर यादव, डॉ. जी.एस. चौबे, कन्नू अजमानी, जवाहरलाल जैन, जगन्नाथ गुरैया और पं. अरविंद तिवारी सहित कई गणमान्य जन उपस्थित रहे।