Sagar - अग्निकुंड मेला का चमत्कार, दहकते अंगारों से निकलते है श्रद्धालु
सागर में एक सिलारी गांव है जहां प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में अग्नि मेला लगता है. कुंड में भरे दहकते अंगारों से श्रद्धालु नंगे पैर निकलते हैं, जिन्हें देखकर लोगों की आंखें फटी रह जाती हैं, मगर जो अंगारों से निकलते हैं, उनके पैरों में छाले तक नहीं पड़ते. यहां हर साल अंगारों पर से निकालने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. पहले ये परंपरा एक दिन की होती थी, लेकिन अब दो दिन अग्निकुंड भरने लगा है,
सिद्धधाम अंजनी माता मंदिर में आयोजित पारंपरिक अग्नि मेला में इस वर्ष भी आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिला, पिछले 27 मंदिर के पुजारी पंडित विनोद पाठक एवं राजेश पाठक द्वारा विधि-विधान से पूजन-अर्चन कराया गया।
ग्राम सिलारी स्थित मंदिर में हर वर्ष मार्गशीर्ष अमावस्या पर आयोजित होता है, जहाँ श्रद्धालु धधकते अंगारों पर से निकलते हैं। यह परंपरा तब शुरू जब गांव के राजाराम पटेल को रामायण पाठ के दौरान स्वप्न में अग्निकुंड से निकलने का संदेश मिला। उन्होंने महेंद्र मिश्रा के साथ इस परंपरा की शुरुआत की, जो आज भी श्रद्धा से निभाई जा रही है। भक्तों का मानना है कि अग्निकुंड से निकलने पर मन्नतें पूरी होती हैं, इसलिए मनौती पूर्ण होने पर लोग अंगारों पर से गुजरते हैं। इस दिन मंदिर परिसर में मेला भी भरता है।
अग्नि मेले में पहुंचे पुराने ग्राम के सीताराम ठाकुर ने बताया कि उनके पुत्र को बचपन से दिमाग की नस दबने की समस्या थी। “हमने दादा के दरबार में आस्था रखी और चमत्कार देखा। आज मेरा बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है और पिछले चार वर्षों से स्वयं भी अग्निकुंड से निकल रहा है,” उन्होंने भावुक होकर कहा।
वहीं 11वीं की छात्रा साधना ठाकुर ने बताया कि यहां हर मनौती पूर्ण होती है। “मैंने पहली बार अग्निकुंड से निकलकर देखा—पैरों में किसी तरह की जलन महसूस तक नहीं हुई