सागर- विधायक और धर्मपत्नी का ठाकुरजी, मुझे और मेरे परिवार से ऐसा लगाव हो गया है कि अब ये अपने ही परिवार के सदस्य लगते हैं : पूज्य इंद्रेश जी महाराज
सागर- विधायक और धर्मपत्नी का ठाकुरजी, मुझे और मेरे परिवार से ऐसा लगाव हो गया है कि अब ये अपने ही परिवार के सदस्य लगते हैं : पूज्य इंद्रेश जी महाराज
भागवत में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग निहित हैं : पूज्य इंद्रेश जी महाराज
सिद्ध क्षेत्र बालाजी मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। विधायक शैलेंद्र जैन सपत्नीक भागवतजी को सिर पर धारण कर कथा स्थल पहुंचे।
सागर में हो रही इस भव्य ठाकुरजी की कथा के मुख्य यजमान विधायक श्री शैलेंद्र जैन और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनुश्री जैन हैं। पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज ने कहा— विधायक जी और उनकी धर्मपत्नी का ठाकुरजी, मेरे तथा मेरे परिवार के प्रति इतना लगाव हो गया है कि अब वे मुझे अपने ही परिवार के सदस्य लगने लगे हैं। इसी भावना से मैं यहां कथा सुनाने आया हूं।
जब यजमान दंपत्ति ने मुझसे सागर में पुनः कथा करने का आग्रह किया, तो मैंने कहा कि अभी थोड़ा रुक जाएं— अभी तो कथा करके लौटे हैं। बाद में मन व्याकुल हुआ, और ठाकुरजी की कृपा से आज पुनः इस भव्य कथा का शुभारंभ हो रहा है।”
यह उद्गार कथा व्यासपीठ से परम श्रद्धेय अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास परम पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज ने व्यक्त किए।
भक्तिभाव से हुआ शुभारंभ
सिद्ध क्षेत्र धर्मश्री बालाजी मंदिर प्रांगण में बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इससे पूर्व विधायक निवास पर पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया। कथा प्रारंभ से पूर्व विधायक जैन ने बालाजी मंदिर पहुंचकर पूजन-अर्चन किया और श्रीमद्भागवत जी का विधिवत पूजन सम्पन्न कराया। इसके पश्चात वे भागवतजी को सिर पर धारण कर शोभायात्रा सहित कथा स्थल पहुंचे।
भागवत के चार तत्व— भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, त्याग
पूज्य महाराजश्री ने कहा— भागवत के चार अक्षर चार तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं: भ से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त से त्याग। यही तत्व मनुष्य को मोक्ष मार्ग की ओर ले जाते हैं।
अपने आशीर्वचन में उन्होंने कहा— देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है लेकिन संस्कारों में कमी हो रही है। हमारे बुंदेलखंड के लोग अत्यंत सरल स्वभाव के होते हैं। उन्होंने ग्रामीण प्रसंग सुनाते हुए बताया कि धर्म का पालन कठिन नियमों से नहीं, बल्कि श्रद्धा और सरलता से होता है।
उन्होंने कहा— कर्म ऐसे करो कि आचार्य स्वयं बुलाकर आपको स्पर्श करें, उनकी दृष्टि आप पर ठहर जाए और उनकी वाणी से आप कृतार्थ हों।
महाराजश्री ने उदाहरण देते हुए बताया— पक्षी स्पर्श से, कछुआ मन से और गुरु वाणी, दृष्टि, मन तथा स्पर्श— सभी से शिष्य का पोषण करते हैं। यही गुरु सेवा की सर्वोच्च उपलब्धि है।
कथा में उन्होंने कुआं जी महाराज की परीक्षा का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए कहा— “ठाकुरजी अपने भक्तों की परीक्षा उनके उत्थान और भलाई के लिए लेते हैं। ठाकुरजी सत्य हैं, चैतन्य हैं और सृष्टि के कण-कण में व्याप्त हैं।”
मीडिया प्रमुख श्रीकांत जैन ने बताया कि वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, कुलपति डॉ. विनोद मिश्रा, पूर्व विधायक सुनील जैन, पूर्व जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया, नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, मनोज जैन, सुरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रथम दिवस कथा श्रवण हेतु पहुंचे।
पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज के सागर आगमन पर भव्य स्वागत
मुख्य यजमान अनुश्री–शैलेंद्र कुमार जैन ने हज़ारों भक्तों के साथ की अगवानी
सागर। सिद्ध क्षेत्र श्री बालाजी धाम मंदिर परिसर में बुधवार से प्रारंभ हुई श्रीमद्भागवत कथा हेतु मुख्य कथा व्यास पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज के आगमन पर पूरे नगर में भक्तिभाव और उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
पूज्य महाराजश्री भोपाल मार्ग से सागर पहुंचे, जहां मुख्य यजमान एवं सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने हज़ारों श्रद्धालुओं के साथ लेहदरा नाके पर उनका भव्य स्वागत किया। इसके पश्चात दिव्य शोभायात्रा संत निवास की ओर प्रस्थान कर गई।
शोभायात्रा का भव्य दृश्य
मार्ग में जगह-जगह स्वागत मंच लगाए गए थे। श्रद्धालुओं ने फूल वर्षा, आरती व जयघोष के साथ महाराजश्री का अभिनंदन किया। पारंपरिक अखाड़ों, डमरू दल, बैंड पार्टियों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने वातावरण में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा भर दी।
जै-जै” के उद्घोषों से गूंजती शोभायात्रा ने पूरे मार्ग को आस्था से सराबोर कर दिया।
संत निवास पहुंचने पर मुख्य यजमान अनुश्री–शैलेंद्र कुमार जैन ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पूज्य महाराजश्री का मंगल स्वागत किया।
पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने योग्य था और पूरा क्षेत्र धार्मिक उल्लास से भर उठा।