नल–जल योजना बना मुसीबत! NH पर बीच सड़क काटकर छोड़ा मलबा… ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
एमपी के रीवा जिले के सिरमौर विधानसभा क्षेत्र के जवा जनपद पंचायत अंतर्गत सैकड़ों ग्राम पंचायतों में नल–जल योजना लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि बड़ी परेशानी बनकर सामने आ रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कार्य करने वाली एनसीसी कंपनी ने पाइपलाइन बिछाने में तमाम नियमों को ताक पर रख दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार प्रावधान था कि राष्ट्रीय राजमार्ग से 15 मीटर दूरी पर खुदाई की जाए, लेकिन कंपनी द्वारा जेसीबी मशीन से सड़क के बिल्कुल किनारे और कई जगहों पर तो बीच सड़क को काटकर पाइपलाइन डाली गई है। स्थिति यह है कि पाइपलाइन बिछाने के बाद गड्ढों को ठीक से भरा तक नहीं गया, जिससे सड़क पूरी तरह बदहाल हो चुकी है।
नहर की पुलिया के पास बड़ी मात्रा में सड़क काटकर अधूरा छोड़ दिया गया है। वहीं कमजोर पुल के ऊपर से पाइपलाइन बिछाने का कार्य ग्रामीणों के गुस्से का बड़ा कारण है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पुल पर अतिरिक्त भार पड़ेगा और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का गुस्सा फूटा एक ग्रामीण ने कहा— नल–जल योजना के नाम पर मनमानी हो रही है। सड़क काटकर छोड़ दी गई है, मरम्मत तक नहीं कराई।
दूसरे ग्रामीण ने बताया— थोड़ी सी बारिश में सड़क कीचड़ और गड्ढों में बदल जाती है… हालात बदतर हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब एक साल पहले बनी पीसीसी सड़क को बीच से काटकर पाइपलाइन डाली गई, लेकिन कार्य होने के बाद भी सड़क को फिर से दुरुस्त नहीं किया गया। नतीजतन सड़क जगह–जगह धंस चुकी है और वाहनों का आवागमन खतरे में पड़ गया है।
विभागीय शर्तें कागजों तक सीमित, पाइपलाइन बिछाने की अनुमति कुछ स्पष्ट शर्तों के साथ दी गई थी— सड़क को पुरानी स्थिति में दुरुस्त करना, यातायात बाधित न करना, सुरक्षा मानकों का पालन, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि इन नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर तत्काल सड़क मरम्मत कराने और पाइपलाइन कार्य को तय मानकों के अनुरूप कराने की मांग की है, ताकि दुर्घटनाओं और अव्यवस्थाओं से बचा जा सके।