सागर-रहली में ठंड बढ़ते ही बदला भगवान का श्रृंगार, देवलिया मंदिर में देवताओं को पहनाए गए गर्म वस्त्र
देशभर में सर्दी ने दस्तक दे दी है और इसके असर की शुरुआत मध्यप्रदेश के सागर जिले में भी दिखाई देने लगी है। ठंड का तापमान गिरते ही रहली क्षेत्र के प्रसिद्ध देवलिया मंदिर समेत आसपास के कई मंदिरों में एक पुरातन परंपरा निभाई जाने लगी है। यहां भगवान को गर्म कपड़े और शॉल पहनाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें सर्दी न लगे। पुजारी नंदकिशोर मिश्रा ने बताया कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और हर साल सर्दी के मौसम की शुरुआत में भगवान का विशेष श्रृंगार बदल दिया जाता है। जैसे ही ठंड बढ़ती है, भगवान को हल्के कपड़ों की जगह अब ऊनी वस्त्र और गरम शॉल पहनाए जाते हैं। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि मान्यता है कि जैसे हम इंसान मौसम के हिसाब से कपड़े बदलते हैं, वैसे ही भगवान का तापमान का ध्यान रखना भी भक्तों का कर्तव्य है।
देवलिया मंदिर के अलावा रहली क्षेत्र के अनेक छोटे-बड़े मंदिरों में भी इसी परंपरा का पालन किया जा रहा है। मंदिरों में भगवान का आकर्षक शीतकालीन श्रृंगार देखने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। कई भक्त तो खास तौर पर ऊनी कपड़े और शॉल भेंट के रूप में अर्पित कर रहे हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान को गर्म वस्त्र पहनाना केवल परंपरा नहीं,
बल्कि भक्ति की वह भावना है जिसमें भक्त अपने आराध्य को अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं। सर्दियों की शुरुआत के साथ यह परंपरा तब तक जारी रहेगी, जब तक मौसम में गर्माहट लौट नहीं आती। इस दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना का माहौल भी और अधिक श्रद्धाभाव से भर जाता है। रहली के देवलिया मंदिर में भगवान का यह गर्म श्रृंगार देखने वाले श्रद्धालु इसे दिव्य और सौभाग्यशाली अनुभव बताते हैं।