सागर- शहर के अनदेखे हीरो, रैगपिकर्स का सम्मान…निगमायुक्त ने कहा-इनकी बदौलत चमकता है सागर!
सागर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम प्रशासन अब उन लोगों तक पहुंच रहा है, जिन्हें अक्सर समाज नजरअंदाज कर देता है। जी हां… हम बात कर रहे हैं रैगपिकर्स यानी कचरा बीनने वालों की, जो शहर के कचरे को अलग-अलग कर स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने आज सुबह शहर निरीक्षण के दौरान इन रैगपिकर्स से सीधे मुलाकात की और उनके काम को सम्मान देते हुए कई अहम बातें कहीं। सागर में शनिवार की सुबह निगमायुक्त सह कार्यकारी निदेशक और सीईओ, सागर स्मार्ट सिटी श्री राजकुमार खत्री अचानक धर्मश्री स्थित सरोज होटल के पास एक छोटी सी कबाड़ दुकान में पहुंचे।
वहां उन्होंने कबाड़ संचालक से कचरे के एकत्रिकरण, सेग्रीगेशन और विक्रय की जानकारी ली। निगमायुक्त ने स्पष्ट कहा कि शहर में वर्षों से काम कर रहे रैगपिकर्स, कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की रीढ़ हैं। ये लोग प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट, कांच, पुट्ठा और कागज जैसे कचरे को सोर्स पर ही अलग कर देते हैं। सुबह-सुबह या रात में पीठ पर बोरी लादे या साइकिल लिए ये लोग शहर के हर कोने में दिखाई देते हैं—और यही उनकी आजीविका है।
खत्री ने बताया कि कचरा बीनने वालों से लेकर कबाड़ खरीदने वालों तक पूरा एक रिसाइक्लिंग चेन काम करता है, जो स्वच्छता सर्वेक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए, नगर निगम इन लोगों को योजनाओं से जोड़कर इनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने मसवासी ग्रांट स्थित कचरा प्रोसेसिंग प्लांट की भी सराहना की, जहां डोर-टू-डोर कचरा एकत्र कर जैविक खाद और पुन: उपयोगी सामग्री तैयार की जा रही है। यहां के एमआरएफ सेंटर में रैगपिकर्स के काम को प्रमुखता से देखा जा सकता है।
निगमायुक्त ने अधिकारियों से अपील की कि शहर के रैगपिकर्स का डेटा तैयार किया जाए, उन्हें निगम की योजनाओं से जोड़ा जाए और मानवीय मूल्यों के आधार पर उनके जीवन की गुणवत्ता सुधारी जाए। उन्होंने कहा—“ये लोग शहर को साफ रखते हैं, अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन्हें बेहतर जीवन दें।