आश्वासन नहीं, खाद चाहिए, दमोह में किसानों का जाम प्रदर्शन
एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के हटा क्षेत्र में खाद की किल्लत से परेशान किसानों का सब्र जवाब दे गया। सोमवार सुबह हजारों किसान हटा-बटियागढ़ मार्ग पर बैठ गए और आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। किसानों की एक ही मांग है – “आश्वासन नहीं, आज ही खाद चाहिए।” प्रशासन उन्हें समझाने में जुटा है, लेकिन धरना जारी है।
सुबह 9 बजे शुरू हुआ ये जाम दोपहर तक जारी रहा। रास्ता जाम होने से एंबुलेंस, स्कूल बसें और अन्य वाहन लंबी लाइन में फंस गए। हालांकि किसानों ने मानवता दिखाते हुए एंबुलेंस को रास्ता दे दिया।
मौके पर तहसीलदार आलोक जैन पहुंचे और किसानों को भरोसा दिलाया कि 17 अक्टूबर को खाद उपलब्ध करा दी जाएगी। लेकिन किसानों का साफ कहना है कि “तारीख नहीं, खाद चाहिए।”
संतोष प्रजापति दिव्यांक किसान ने बताया कि 15 दिन पहले टोकन मिला था, लेकिन आजतक खाद नहीं मिली। रोज चक्कर लगा रहे हैं। तीन बोरी भी मिल जाए तो खेती बच जाए।
बरोदा गांव से आए किसान चंद्रेश राठौर ने प्रशासन को सीधे सवालों के घेरे में खड़ा किया।
चंद्रेश राठौर ने बताया कि हम आतंकवादी नहीं हैं, खाद के लिए आवाज उठा रहे हैं। ब्लैक में बिक रही खाद पर कार्रवाई होनी चाहिए।
रसोटा गांव की महिला किसान भी मोर्चे पर डटी रहीं। खेतों की मिट्टी सूख रही है, पानी की सिंचाई की सुविधा नहीं, इसलिए तुरंत खाद की जरूरत बताई।
क्रांतिबाई महिला किसान ने बताया कि हम बच्चे छोड़कर आए हैं। अब आश्वासन नहीं, खाद चाहिए। पांच मिनट में पुलिस आ जाती है, तो खाद की गाड़ी क्यों नहीं?”
टीआई धर्मेंद्र उपाध्याय भी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की, लेकिन विरोध कम नहीं हुआ। किसानों का आरोप है कि सरकारी दुकानों में स्टॉक नहीं दिया जा रहा, जबकि ब्लैक मार्केट चल रहा है।
तहसीलदार ने किसानों से दुकानों के नाम पूछकर तत्काल कार्रवाई का भरोसा दिया, लेकिन भीड़ हटने को तैयार नहीं। स्कूली बच्चों की बसें जाम में ही फंसी रहीं, और कई किलोमीटर तक वाहनों की लाइन लग गई।
प्रशासन और किसान आमने-सामने हैं। सवाल ये है, क्या आज ही समाधान निकलेगा या किसानों का धैर्य और उफान मचाएगा?