कमलनाथ पहुंचे परासिया, कफ सिरप मामले में मृत बच्चों को दी श्रद्धांजलि, सरकार पर बरसे सवालों की बौछार
एमपी के छिंदवाड़ा ज़िले के परासिया में जहरीली कफ सिरप से हुई मासूमों की जान जाने ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इसी दर्दनाक घटना के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ यहां पहुंचे। तीन दिवसीय छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान वे सीधे परासिया गए, जहां उन्होंने मृत बच्चों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। कमलनाथ ने पीड़ित परिवारों से घर-घर जाकर मुलाकात की। परिजनों ने रोते-बिलखते बताया कि दवाई समझकर दी गई सिरप ने उनके मासूमों की जान ले ली।
कमलनाथ ने ढांढस बंधाते हुए हर संभव मदद का आश्वासन दिया और कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की लापरवाही का नतीजा है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने सरकार पर सीधा वार बोला। कमलनाथ ने कहा, “मैं लगातार सरकार से पूछता रहा कि आप क्या टेस्टिंग कर रहे हैं, लेकिन सच सामने तब आया जब जांच में पता चला कि दवाइयों में जहरीला केमिकल मिला हुआ है। मध्यप्रदेश में तो पांच प्रतिशत दवाओं की भी लैब टेस्टिंग नहीं होती।”
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जिस कंपनी की दवाई तमिलनाडु से लाई गई थी, वह जाने कितने जिलों में सप्लाई की गई और कितनी जानें गईं, इसका कोई रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं है। कमलनाथ ने आरोप लगाते हुए कहा कि अगर यह घटना उजागर न होती तो दवा माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत पर पर्दा ही पड़ा रहता। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “मुझे यहां आकर बहुत दुख हुआ। मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि मैं इन परिवारों से मिल सकूं, लेकिन उनका दर्द सुनना जरूरी था।
जिनकी जिम्मेदारी थी, उन्होंने अपनी आंखें मूंद लीं।” इस दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं की भी भीड़ उमड़ी रही। परासिया के लोग अब एक ही सवाल पूछ रहे हैं—क्या मासूमों की मौत पर सिर्फ बयानबाज़ी होगी या दोषियों पर कार्रवाई भी? कमलनाथ ने आश्वस्त किया कि वे विधानसभा और सड़क, दोनों स्तरों पर इस लड़ाई को जारी रखेंगे। प्रदेश राजनीति में यह मुद्दा एक बार फिर सरकार की जिम्मेदारी और दवा नियंत्रण प्रणाली पर बड़े सवाल खड़ा कर रहा है।