Sagar- नवरात्र में शेर नृत्य, बच्चे से बुज़ुर्ग तक झूमे भक्ति में, मां के दरबार में गूंजा शेर नृत्य
नवरात्र का पर्व हो और मां शेरावाली का दरबार सजे, लेकिन शेर नृत्य ना हो ऐसा बुंदेलखंड में सोचा भी नहीं जा सकता। यहां शारदीय नवरात्रि के दौरान पारंपरिक और आध्यात्मिक रूप से होने वाला शेर नृत्य आज भी बेहद लोकप्रिय है। सागर जिले के रहली क्षेत्र में इस परंपरा को लोग आज भी पूरे उत्साह और भक्तिभाव से निभाते हैं।
नवरात्र के अवसर पर बच्चे हों या बुजुर्ग — सभी मां के दरबार में शेर बनकर नृत्य करने को उत्साहित रहते हैं। शरीर पर पीला रंग पोतकर, चेहरे पर मेकअप कर, महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे शेर का रूप धारण करते हैं। पांच साल के बच्चों से लेकर 50-60 साल के लोग तक इस परंपरा में शामिल होते हैं।
किसी के लिए यह आस्था का विषय है तो कोई मां से मन्नत मांगकर शेर नृत्य करता है। कई लोग लगातार 10-10 सालों से शेर बनकर नृत्य कर रहे हैं, तो कई ऐसे भी हैं जिन्हें यह निभाते हुए एक-दो साल ही हुए हैं। कुछ परिवारों में तो यह परंपरा पीढ़ियों तक चली आ रही है।
मान्यता है कि मां के समक्ष शेर बनकर नृत्य करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हालांकि वक्त के साथ अब लोग सिर्फ मन्नत नहीं, बल्कि श्रद्धा और खुशी से भी इस नृत्य में हिस्सा लेते हैं।
कभी गांव के बुजुर्ग और सयाने ही शेर बनकर मां की आराधना करते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। आज युवा और बच्चों में इस परंपरा को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह देखा जा रहा है।
हरिकांत पटेल, श्रद्धालु ने बताया कि हमारे यहां बरसों से शेर नृत्य की परंपरा है। लोग श्रृद्धा और मन्नत से यह रूप धारण करते हैं। बच्चों में अब इसका उत्साह और बढ़ गया है।
नवरात्रि के इन पावन दिनों में मां के दरबार में उमंग, भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलता है। शेर नृत्य सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की जीवंत सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।