सागर-17 लाख के गहनों से सजी आस्था की अद्भुत परंपरा, बीना की ‘नगर सेठानी’ मन्नत वाली महाकाली
नवरात्र के पावन अवसर पर सागर जिले के बीना शहर में आस्था का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्ति के रंग में रंग दिया है। स्टेशन रोड शिव वॉर्ड स्थित शिव मंदिर के पास स्थापित “मन्नत वाली महाकाली” की प्रतिमा ना सिर्फ भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बनी है, बल्कि लाखों की आस्था को भी एकजुट कर रही है। खटीक समाज द्वारा लगातार पांचवें वर्ष स्थापित की जा रही इस प्रतिमा को भक्त “नगर सेठानी” के नाम से भी जानते हैं। माता महाकाली को अब तक करीब 16 से 17 लाख रुपये के चांदी के गहने अर्पित किए जा चुके हैं।
भक्तों का विश्वास इतना गहरा है कि नवरात्र समाप्त होते ही इन गहनों को बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है और केवल माता की सेवा के लिए सुरक्षित रखा जाता है। मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी झोली खाली नहीं लौटती। यही कारण है कि बीना समेत आसपास के इलाकों से रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। भले ही इसकी शुरुआत खटीक समाज ने की हो, लेकिन यह आयोजन अब पूरे नगर का महापर्व बन चुका है।
सप्तमी के दिन यहां भव्य महाआरती के साथ 56 भोग का आयोजन होता है। हजारों श्रद्धालु इस अवसर पर शामिल होकर माता के दरबार में मुरादें मांगते हैं। भक्तों की आस्था का यह सैलाब हर साल और अधिक विशाल होता जा रहा है। जहां देशभर में नवरात्र के समापन पर दशहरा के दिन प्रतिमाओं का विसर्जन होता है, वहीं बीना की मन्नत वाली महाकाली की प्रतिमा का विसर्जन एकादशी को किया जाता है। यह परंपरा भी इस आयोजन को खास और अनोखा बनाती है। आस्था, परंपरा और विश्वास के इस संगम ने “मन्नत वाली महाकाली” को बीना शहर की पहचान बना दिया है। श्रद्धा का ऐसा समर्पण कम ही देखने को मिलता है।