Sagar- मां वैष्णो देवी का अद्भुत धाम, सुबह कन्या, दोपहर युवती, शाम वृद्धा – मां के चमत्कार
सागर जिले के मालथौन क्षेत्र के बरौदिया कलाँ गांव में स्थित किले के भीतर मां वैष्णो देवी का मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। नवरात्रि में यहां देशभर से श्रद्धालु उमड़ते हैं। मान्यता है कि मां यहां तीन अलग-अलग रूपों में भक्तों को दर्शन देती हैं। बरौदिया कला की पहाड़ी पर बसे प्राचीन किले में करीब 30 वर्ष पहले मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था। उस समय यहां भगवान शिव की स्थापना की योजना थी,
लेकिन ग्रामीण बताते हैं कि निर्माण कार्य के बाद गांव के लोगों को लगातार मां वैष्णो देवी ने स्वप्न में दर्शन दिए और मंदिर में अपना स्थान बनाने का आदेश दिया। ग्रामवासियों ने आपसी चर्चा के बाद मां की स्थापना 11 अक्टूबर 1999 को की। तभी से यह मंदिर आस्था का केंद्र बन गया। यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि मां वैष्णो देवी के चरणों में जो भी सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मां दिन के तीनों पहरों में अलग-अलग रूप में प्रकट होती हैं। प्रातःकाल मां कन्या स्वरूप में, दोपहर को युवती के रूप में और सायंकाल वृद्धा के रूप में दर्शन देती हैं। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के अनुसार इस चमत्कार को कई बार प्रत्यक्ष रूप से महसूस किया गया है। बरौदिया कला के इस किले का प्राकृतिक वातावरण भी इस धाम की पवित्रता और खूबसूरती को और बढ़ा देता है।
समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों द्वारा कराया जाता रहा है। नवरात्रि में यहां विशाल मेले का आयोजन होता है और हजारों की संख्या में भक्त माता के जयकारे लगाते हुए दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बरौदिया कला किले का यह धाम आज सिर्फ स्थानीय ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की आस्था का केंद्र बन चुका है। मां वैष्णो देवी के तीन रूपों में दर्शन की मान्यता इसे और भी अद्वितीय बना देती है।