Sagar-पहाड़ों पर विराजीं हरसिद्धि माता तीन रूपों में देती दर्शन, श्रद्धालुओ की उमड़ रही भीड़
सागर के रानगिर में विराजी मां हरसिद्धि तीन रूप में दर्शन देती हैं इतना ही नहीं ये देश का इकलौता देवी का दक्षिण मुखी मन्दिर है, जो देहार नदी के तट पर स्थित है, इस प्राचीन मंदिर में विराजी मां हरसिद्धि प्रात: काल मे कन्या, दोपहर में युवा और सायंकाल प्रौढ़ रुप में माता के दर्शन होते है। इस बार नवरात्रि में सुबह से ही हजारो भक्तो की भीड़ आ जाती है जो दो पुलिस वालो को संभालना मुश्किल हो रहा है, साथ ही श्रद्धालु सुविधाजनक दर्शन कर सकें, इसके लिए दरवाजे को बड़ा कर दिया गया,
किवदंती के अनुसार देवी भगवती के 52 सिद्ध शक्ति पीठों में से एक शक्तिपीठ है सिद्ध क्षेत्र रानगिर। यहां पर सती की रान गिरी थी। इस कारण यह क्षेत्र रानगिर कहलाया। रानगिर का यह मंदिर सदियों पुराना है। इस स्थान के विषय में कहा जाता है की यह मंदिर पहले रानगिर में नहीं था, नदी के उस पार देवी जी रहती थी। प्रतिदिन माता कन्याओं के साथ खेलने के लिए आया करती थी। एक दिन गांव के लोगों ने छिपकर देखा कि यह किसकी लड़की है सुबह खेलने आती है एवं सायंकाल को कन्याओं को एक चांदी का सिक्का देकर बूढ़ी रानगिर को चली जाती हैं। जैसे ही कन्या की नजर ग्रामीणों पर पड़ी तो वह पत्थर की हो गई कन्या का चबूतरा बना कर उस पर छाया की और यहीं से मां हरसिद्धि की स्थापना हुई।
रानगिर मंदिर के पुजारी शिवम् शास्त्री ने बताया कि देश का दुर्गा जी का इकलौता दक्षिण मुखी मंदिर है. हनुमान जी शिवजी सहित अन्य मंदिर तो दक्षिण मुखी मिल जाते हैं. लेकिन माता का मंदिर और कहीं नहीं है,
देहार नदी के पूर्व तट पर घने जंगलों एवं सुरम्य वादियों के बीच स्थित हरसिद्धि माता के दरबार में पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय सागर से दो तरफा मार्ग है।