शव को कचरा वाहन से ले जाया गया, नगर पालिका उपाध्यक्ष बोले यही है शव वाहन
एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक व्यक्ति के शव को पोस्टमार्टम के बाद कचरा वाहन में रखकर गांव ले जाया गया। शुक्रवार सुबह हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया और अब नगर पालिका पर सवालों की बौछार होने लगी है। जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के हटा नगर से शिकारपुरा गांव निवासी देवेंद्र लोधी के रूप में हुई है,
जिसकी मर्डर कर दिया गया था। परिजनों का आरोप है कि जब वे पोस्टमार्टम के बाद शव लेने पहुंचे तो उन्हें एक कचरा वाहन दिखाया गया और कहा गया कि शव इसी में ले जाना होगा। मजबूरी में मृतक के परिजनों ने उसी वाहन में शव को गांव तक ले जाने का निर्णय लिया। मृतक के परिजन चंदन सिंह का कहना है कि उन्हें स्पष्ट तौर पर बताया गया था कि हटा नगर में कोई शव वाहन उपलब्ध नहीं है। यही वजह रही कि उन्हें अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा।
वहीं, इस मामले में हटा नगर पालिका उपाध्यक्ष नीलू पाठक ने सफाई दी है। उनका कहना है कि नगर पालिका के पास अलग से कोई शव वाहन नहीं है। इसलिए एक टिप्पर वाहन को ही शव वाहन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। पाठक ने यह भी कहा कि इस वाहन का इस्तेमाल कचरा ढोने के लिए नहीं होता और जल्द ही इस पर शव वाहन लिखवाया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब दमोह जिले के लिए हाल ही में शासन द्वारा दो नए शव वाहन उपलब्ध कराए गए हैं,
तो फिर हटा जैसे नगर में शव को कचरा वाहन में क्यों ले जाना पड़ा? इस पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सीएमएचओ आरके अठया ने सफाई देते हुए कहा कि शासन से मिले शव वाहन केवल उन मामलों में उपयोग किए जाते हैं, जहां किसी मरीज की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होती है। जबकि अस्पताल से बाहर हुई मौतों के लिए फिलहाल यह सुविधा नहीं है। अब सवाल यही है कि प्रशासन के पास दो नए शव वाहन उपलब्ध होने के बावजूद एक परिवार को अपमानजनक स्थिति क्यों झेलनी पड़ी? क्या नियमों में सुधार कर आम लोगों को इस तरह की दिक्कतों से राहत दिलाई जाएगी?