बरसात और उमस भरे मौसम में बीमारियों, मरीज बेहाल, डॉक्टर नदारद! अस्पताल में एक डॉक्टर, सैकड़ों मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बरसात और उमस भरे इस मौसम में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। उल्टी, दस्त, बुखार और सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से परेशान मरीजों की लंबी कतारें अस्पताल का रुख कर रही हैं, लेकिन दुर्भाग्य देखिए – इलाज करने वाला कोई नहीं! एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के पथरिया में गुरुवार सुबह 9:30 बजे का वक्त था, जब अस्पताल में सैकड़ों मरीज पहुंच चुके थे।
लेकिन पूरे स्वास्थ्य केंद्र में सिर्फ एक डॉक्टर मौजूद था। न समय पर ड्रेसिंग स्टाफ पहुंचा, न ही कंप्यूटर ऑपरेटर। ऐसे में इलाज के लिए घंटों इंतज़ार करते मरीजों के चेहरों पर सिर्फ मायूसी और थकावट नजर आई। बिजली कटौती के समय चलने वाला जनरेटर भी महीनों से बंद पड़ा है, और गर्मी में बेहाल मरीज बिना पंखों के बैठे रहे। सबसे बड़ी बात – मरीजों को अस्पताल के बाहर की महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यानी इलाज भी नहीं, और आर्थिक बोझ भी अलग!
स्वास्थ्य केंद्र में जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत है सुविधाओं की, तब लापरवाही का यह आलम गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन की निष्क्रियता और स्टाफ की गैरहाजिरी से मरीजों की हालत और खराब हो रही है। अब सवाल ये है कि – क्या स्वास्थ्य विभाग सिर्फ कागजों में एक्टिव है? जिनके पास प्राइवेट इलाज का साधन नहीं, वो कहां जाएं? पथरिया के इस अस्पताल में सुधार कब होगा? यह मामला सिर्फ एक अस्पताल का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आइना है, जो आम आदमी की सेहत को नजरअंदाज कर रही है।