मौत के बाद भी ज़िंदा हैं लीना की बातें, डायरी ने सबको भावुक कर दिया, आखिरी पंक्तियां आज भी दिल छू रही हैं
एमपी के उज्जैन की रहने वाली लीना वर्मा अब इस दुनिया में नहीं हैं… लेकिन उनकी लिखी एक डायरी आज भी लोगों की आंखें नम कर देती है। मौत को चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनके शब्द आज भी ज़िंदा हैं – उम्मीद और प्रेरणा की तरह। 22 अप्रैल 2025… यही वो दिन था जब लीना वर्मा का निधन कार्डियक अरेस्ट से हो गया। लेकिन जाते-जाते वो एक ऐसी डायरी छोड़ गईं, जिसमें उन्होंने समाज के असली हीरोज़ – डॉक्टर, सैनिक, किसान और शिक्षक – को शुक्रिया कहा। लीना, बाबा महाकाल की अनन्य भक्त थीं। उनके अंतिम समय में भी, उनके हाथों में बाबा की तस्वीर थी और वो "ॐ नमः शिवाय" का जाप कर रही थीं।
लीना के पति संजय वर्मा बताते हैं कि डायरी में उन्होंने न सिर्फ समाजसेवियों को धन्यवाद कहा, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं की तारीफ भी की है। लीना के दो बेटे – पार्थ और रुद्राक्ष – आज भी अपनी मां की यादों में जी रहे हैं। पार्थ ने मां की याद में कई पेंटिंग्स बनाई हैं, जो अब उस डायरी के साथ एक भावनात्मक धरोहर बन चुकी हैं। "मां ने कभी हार नहीं मानी... बीमारी में भी मुस्कुराती रहीं। अब उनकी डायरी और पेंटिंग ही हमारे पास हैं..." लीना की ये कहानी आज भी उन लोगों को प्रेरणा देती है जो ज़िंदगी की मुश्किलों से हार मान लेते हैं। जाते-जाते भी लीना सिखा गईं – कैसे मुस्कुराना है, कैसे धन्यवाद कहना है... और कैसे हर पल को सकारात्मक जीना है।