दो मौतों के बाद मगरमच्छों का रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, घाट से चार मगरमच्छ पकड़कर दिलाई लोगों को राहत
व्यारमा नदी में इन दिनों मगरमच्छों का आतंक छाया हुआ था। दो लोगों की मौत के बाद बढ़े जनआक्रोश और डर को देखते हुए वन विभाग ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लगातार चल रहे इस अभियान में शनिवार सुबह चौथी बड़ी सफलता हाथ लगी, जब एक और मगरमच्छ पिंजरे में कैद कर लिया गया। एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले की कनिया घाट पटी के पास नदी में लगाया गया ट्रैप केज (पिंजरा) इस बार भी कारगर साबित हुआ और वन विभाग ने करीब 6-8 फीट लंबे इस मगरमच्छ को सकुशल पकड़ लिया।
डीएफओ ईश्वर जरांडे के निर्देशन और वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रम चौधरी के नेतृत्व में चल रहे इस ऑपरेशन में अब तक कुल चार मगरमच्छ पकड़े जा चुके हैं। रेस्क्यू टीम को पहले ही तीन मगरमच्छ पिंजरे में मिल चुके थे और शनिवार को सुबह चौथे मगरमच्छ के पकड़े जाने की खबर ने स्थानीय लोगों को राहत की सांस दी। लंबे समय से मगरमच्छों का खतरा देखते हुए आसपास के गांवों में डर का माहौल था, पर अब लगातार हो रही कामयाबी से लोग खुश और संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
इस ऑपरेशन को सफल बनाने में वन विभाग के डिप्टी रेंजर प्रेमलाल अहिरवार, वन रक्षक मयंक विश्वकर्मा, ईश्वर कांत मिश्रा, अमित तिवारी और लक्ष्मीकांत की भी अहम भूमिका रही। टीम की सतर्कता और दिन-रात की मेहनत से ही लगातार मगरमच्छों को काबू किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, ये मगरमच्छ लंबे समय से नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों और नहाने-धोने जाने वाले लोगों के लिए खतरा बने हुए थे। दो मौतों के बाद लोगों का गुस्सा बढ़ा और डर के चलते कई लोगों ने नदी के किनारे जाना भी बंद कर दिया था। मगर अब रेस्क्यू ऑपरेशन के सफल होने से गांव वालों के चेहरों पर राहत और खुशी की झलक दिखाई दे रही है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रम चौधरी ने बताया कि व्यारमा नदी में मगरमच्छों की संख्या अभी भी अधिक हो सकती है, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन अगले कुछ दिनों तक लगातार जारी रहेगा। विभाग की कोशिश है कि सभी मगरमच्छों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में शिफ्ट किया जाए, ताकि ग्रामीणों को किसी भी प्रकार का खतरा न रहे। गांव के लोगों ने वन विभाग से अपील की कि जब तक पूरी तरह से खतरा टल नहीं जाता, रेस्क्यू ऑपरेशन बंद न किया जाए। साथ ही नदी किनारे चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा के लिए गार्ड भी तैनात किए जाएं, ताकि दोबारा कोई हादसा न हो। वन विभाग की मुस्तैदी और लगातार मिल रही सफलताओं से एक बार फिर यह साबित हो गया कि सही दिशा में काम हो, तो जंगली जानवरों से भी इंसानों को सुरक्षित रखा जा सकता है।