Sagar- खूबसूरत वाटरफॉल उफान पर, पहले ही दिन पर्यटकों की उमड़ी भीड़, कलेक्टर भी कह उठे वाह !
सागर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से राहतगढ़ वॉटरफॉल अपने पुराने रूप में लौट आया है जैसे ही राहतगढ़ वॉटरफॉल का जलप्रपात शुरू हुआ तो पर्यटकों की भीड़ पहुंचने लगी इतना ही नहीं जिला कलेक्टर संदीप जीआर भी इस खूबसूरत वॉटरफॉल को देखने के लिए पहुंचे और पर्यटकों से चर्चा की जिसमें उन्होंने कहा कि पर्यटन और सौंदर्य के लिए राहतगढ़ वॉटरफॉल अद्भुत है,बरसात के मौसम में वॉटरफॉल की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है उन्होंने सभी पर्यटकों से कहा यहां आए और वॉटरफॉल का मजा ले यह हमारी प्राकृतिक धरोहर है इसलिए इसे साफ और स्वच्छ बनाए रखना भी हम सब का कर्तव्य है
राहतगढ़ वाटरफॉल में करीब 40 फीट नीचे गिरता झरना लोगों को अपनी तरफ खींचता है. इससे उठने वाला धुंआ सैलानियों के आनंद को दोगुना कर देता है. यह जलप्रपात सागर जिले की बीना नदी पर राहतगढ़ में है. पहले यह वॉटरफॉल 12 महीने आकर्षण का केंद्र होता था. लेकिन, धीरे-धीरे जैसे लोग प्रकृति के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं. यह वॉटरफॉल भी सिमटता जा रहा है. अब बारिश के दिनों में ही यह अपने असली रंग में आ पाता है.
बीना नदी की गणना सागर जिले की प्रमुख नदियों में होती है. बेगम गंज जिला रायसेन में अपने उदगम से निकल कर सागर जिले में प्रवेश कर बहती हुई राहतगढ़ आती है, यहां इस पर एक मनोरम प्रपात है. वाटरफॉल से आगे बढ़ते हुए से यह राहतगढ़ किले की लगभग परिक्रमा करती हुई बनेनी घाट पर पहुंचती है. यहां स्थित परमार वंश कालीन एक सो आठ शिवलिंग मंदिर को नमन करती है. फिर यह विंध्याचल के सघन वनों में अपना रास्ता बनाते हुए बीना तहसील की ओर आगे बढ़ जाती है. बीना तहसील में इसके तट पर प्राचीन सभ्यता एरण पुरातत्व स्थल स्थित है. एरण से आगे चल कर यह विदिशा जिले में प्रवेश करती है और आगे चल कर यह वेतवा नदी में मिल जाती है. इस प्रकार इस नदी की जीवन यात्रा पूरी होती है
सागर मुख्यालय से यह करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है राहतगढ़ नगर से इसकी दूरी लगभग 2 किलोमीटर है वाटरफॉल तक पैदल या वाहन से जा सकते हैं