Sagar- जापानी बुखार पर डॉक्टरों का चौंकाने वाला रिसर्च, अलर्ट नहीं हुए तो तबाही मचा देगा ये वायरस
जानलेवा जापानी बुखार को लेकर सागर और भोपाल एम्स के डॉक्टरों की रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस मध्य प्रदेश में तेजी से पैर पसार रहा है, लेकिन धान उत्पादित क्षेत्र में सबसे ज्यादा वायरस पाया गया है. क्योंकि, यहां पर क्लूलो मॉस्किटो ज्यादा होते हैं, जिसके कारण यह इंसानों में फैला है. मध्य प्रदेश के सागर, छिंदवाड़ा, इटारसी, रीवा, नरसिंहपुर, बालाघाट सहित अन्य जिलों में इसके अधिक पाए जाने की पुष्टि हुई है. यह वायरस बारिश के मौसम और गर्मी की शुरुआत में फैलता है.
दरअसल, मध्य प्रदेश में जापानी बुखार का वायरस रिपोर्ट होने के बाद साल 2016 से डॉक्टरों की टीम ने इस पर काम करना शुरू कर दिया था. लेकिन, साल 2022 से इस पर रिसर्च शुरू हो सकी. इसमें डॉक्टरों की टीम ने जानवरों और इंसान में किए गए शोध से जापानी बुखार के फैलाव की संभावना और स्त्रोत का पता लगाया है. इस रिसर्च में पता चला कि जापानी इंसेफेलाइटिस वायरल इंसानों में मच्छरों द्वारा फैलता है. इसके लिए डॉक्टरों ने प्रदेश के 22 से अधिक जिलों में रिसर्च किया, जिसमें यह बात सामने आई है.
शोधकर्ताओं में भोपाल एम्स के डॉ. देवाशीष विश्वास, आईसीएमआर डॉ. रामकुमार नेमा ,पशु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अश्विन रावत और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के डॉ.सुमित रावत सहित दर्जन भर डॉक्टर की टीम ने इस पर काम किया.
इस रिसर्च में शामिल डॉ. सुमित रावत ने बताया, जापानी इंसेफिलाइटिस को लेकर मलेरिया विभाग द्वारा समय-समय पर टीकाकरण कराया जाता है. लेकिन, इससे बचाव के लिए बुखार आने पर मरीज को तुरंत डॉक्टरी परामर्श जरूरी है. मच्छरों से बचाव करना चाहिए. इस वायरस से पीड़ित मरीज को झटके आना, दिमागी बुखार में इलाज न मिलने पर मौत भी हो सकती है