सागर नगर निगम की नई स्मार्ट बिल्डिंग में न पानी, न इंटरनेट – जनता बेहाल | sagar tv news |
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करोड़ों की लागत से बनी सागर नगर निगम की नई बिल्डिंग जनता की सेवा के उद्देश्य से बनकर तैयार तो हो गई, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने इसकी स्मार्ट पहचान को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। शहर की इस बहुप्रतीक्षित और हाईटेक बताई गई बिल्डिंग में आज न पीने के लिए पानी है, न ही इंटरनेट कनेक्टिविटी।
17 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह इमारत 23 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लोकार्पित की गई थी। इसे स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर की प्रमुख प्रशासनिक सेवाओं का केंद्र बनाया गया, जहां आम जनता जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, नामांतरण, राजस्व रिकॉर्ड, लोक सूचना अधिनियम जैसे कार्यों के लिए रोजाना बड़ी संख्या में पहुंचती है। मगर इस स्मार्ट बिल्डिंग की हालत यह है कि जनता को पीने के पानी तक के लिए भटकना पड़ रहा है। कर्मचारी स्वयं अपनी बोतलें लेकर आ रहे हैं। भवन में न कोई आरओ सिस्टम है, न ही कोई वाटर कूलर चालू अवस्था में। जनता गर्मी और प्यास से बेहाल है।
इतना ही नहीं, इंटरनेट जैसी बुनियादी डिजिटल सुविधा का भी यहां टोटा है। निगम कर्मचारियों को सरकारी कार्यों के लिए अपने निजी मोबाइल डेटा का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल सरकारी काम प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने पर भी सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम जैसी संस्था जो पूरे शहर को पानी और विकास योजनाएं देने की जिम्मेदारी निभाती है, अपने ही मुख्यालय में बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रही है। यह स्थिति न केवल जनता की परेशानी को बढ़ा रही है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रही है।
इस पूरे मामले पर जब नगर निगम आयुक्त श्री राजकुमार खत्री से बात की गई, तो उन्होंने माना कि पानी और इंटरनेट की व्यवस्था में देरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा और संबंधित टेंडर प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा रही है। सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी लागत और लंबे इंतजार के बाद बनी स्मार्ट बिल्डिंग इतनी भी स्मार्ट नहीं है कि पानी और इंटरनेट जैसी जरूरतें खुद समय पर उपलब्ध करा सके? जनता अब सिर्फ वादों पर नहीं, सुविधाओं पर भरोसा करना चाहती है।