कलयुग की सावित्री: सपना और सुबोध चतुर्वेदी की कहानी जो दिल को छू जाती है।
ये तस्वीरे अपने आप मे बहुत कुछ बयान कर रही है। भले ही तस्वीरो में दिखाई दे रही ये महिला मुस्कुराते हुए दिखा रही हो लेकिन इसके पीछे एक गहरा दर्द है। एक ऐसी तकलीफ जिसे शायद शब्दों में बयान करना भी मुश्किल होगा। ये महिला है सपना चतुर्वेदी। एक आम भारतीय पत्नी लेकिन इनकी कहानी इतनी खास है जिसे देखने से आपको इसके पीछे का दर्ज समझ आएगा।
सपना को आज लोग कलयुग की सावित्री कहते है उनकी कहानी दिल को छू जाती है। वो और उनके पति सुबोध कुमार चतुर्वेदी दोनों का जीवन आज एक प्रेरणा बन गया है। वैसे तो दोनों अपने जीवन और रोज मर्रा से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया में शेयर करते है जो उन्हें एक डिजिटल क्रिएटर बनाता है। लेकिन इसकी शुरआत कैसे हुई ये जानने आपको साल 2009 में जाना होगा।
सपना और सुबोध की शादी इसी साल 2009 में हुई थी। नई-नई शादी, नई जिंदगी, नई उम्मीदें। सपना भी हर नयी दुल्हन की तरह एक सुंदर, खुशहाल जीवन के सपने बुन रही थीं — प्यारा पति, प्यारे बच्चे, एक भरा-पूरा घर था लेकिन लेकिन फिर एक दिन...फोन की एक घंटी ने सबकुछ बदल दिया।
सपना को कॉल आता है की भैया का एक्सीडेंट हो गया है — इन शब्दों ने सपना का पूरा जीवन मनो बदल दिया।
सपना को लगा की सुबोध को शायद कोई मामूली चोट होगी जो ठीक हो जाएँगी लेकिन जैसे-जैसे सच्चाई सामने आई, पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
पति की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट थी। डॉक्टरों ने कहा — पैराप्लेजिया है — यानी कमर के नीचे का हिस्सा अब काम नहीं करेगा। अब सवाल सामने था “क्या कभी सुबोध चल पाएंगे?”
ऑपरेशन भी हुआ,ऑपरेशन के बाद भी पैरों में कोई हलचल नहीं थी । डॉक्टरों ने कहा, अब कोई दवा नहीं — सिर्फ फिजियोथेरेपी और एक्ससरसीज़ ही सहारा है। इस पर भी सपना ने उम्मीद नहीं छोड़ी।
अब यहाँ से शुरू हुई सपना की असली कहानी।
सपना ने ठान लिया — अगर कोई उनके पति को दोबारा खड़ा नहीं कर सकता, तो मैं करूँगी।”
हर दिन, हर रात... सपना उनके साथ लगी रहीं। पैर पकड़कर एक्सरसाइज करवाई, ढाढ़स बंधाया, और परिस्तिथि के आगे घुटने न टेक कर सिर्फ अपने पति को ठीक करने के जूनून में लगी रही। फिर क्या था एक दिन उसकी मेहनत रंग लायी और उसके पति की पैर की उंगली हिली।
वो छोटी सी हरकत, पूरे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। फिर सपना ने रुकना नहीं सीखा — उनके पति ने करवट लेना शुरू किया, फिर बैठना सीखा... और आज कुछ कदम चलना भी।
आज उस हादसे को 12 साल बीत चुके हैं अब भी सुबोध पूरी तरह ठीक नहीं हुए, लेकिन उम्मीद से ज्यादा रिकवरी हो चुकी है — वो भी सिर्फ सपना की बदौलत। हर सुबह सपना अपने पति को कंधे पर उठाकर फिजियोथेरेपी के लिए ले जाती है ।
आप सोच सकते हैं? एक पत्नी अपने पति को रोज़ अपने कंधे पर उठाकर सफर करती है — और फिर भी मुस्कराती है।
सुबोध आज भी कहते हैं: अगर मैं आज थोड़ा भी चल पा रहा हूं, तो वो सिर्फ सपना की वजह से। मैं इन्हें अपनी पत्नी नहीं, देवी मानता हूं — कलयुग की सावित्री।
दोनों की ये कहानी आज सोशल मीडिया पर रोजाना लोग देखते है। उनके हजारो लाखो फोल्लोवेर्स है जो सोशल मीडिया पर उनको दुआए देते है। दोनों आज अपने बेटे और माँ के साथ जीवन जी रहे है।
जब सोशल मीडिया पर रिश्ते केवल पोस्ट और रील्स में सिमट गए हैं — सपना की कहानी दिल छू जाती है।
यह सिर्फ एक कहानी नहीं, यह एक प्रेरणा है —कि जब जीवनसाथी पर मुसीबत आए, तो उसे बोझ नहीं, समझना चाहिए। क्योंकि असली प्यार वही है, जो वक्त के सबसे कठिन इम्तिहान में भी साथ ना छोड़े।