62 एकड़ जमीन के मालिक भगवान बिहारी, नहीं कोई ठिकाना, 20 साल से पंचायत भवन में कैद!
कहते हैं कि यह पृथ्वी मृत्युलोक है और यहां पर जो भी आया है उसने कभी न कभी कष्ट जरूर भोगना पड़ा है. इंसान तो इंसान इस अटल सत्य से भगवान भी अछूते नहीं रहे हैं. ये बात दमोह में बिल्कुल सार्थक हो रही है. यहां पर भगवान बिहारी जू सरकार करोड़ों रुपए की संपत्ति के मालिक होते हुए भी एक कमरे में कैद हैं. मंदिर न होने की वजह से पिछले 20 साल से पंचायत भवन के एक कमरे में उनकी प्रतिमा को स्थापित कर दिया गया है. प्रतिदिन सुबह-शाम आधे घंटे के लिए कमरा खुलता है, बिहारी जू को आरती सेवा और भोग लगाया जाता है, फिर कमरा बंद कर दिया जाता है. यह सिलसिला 2 दशक से चला आ रहा है.
दरअसल, 20 साल पहले 2005 में आई विनाशकारी बाढ़ में हटा तहसील के बिजावर गांव स्थित भगवान बिहारी जू सरकार का मंदिर गिर गया था. उस समय बिहारी जू की प्रतिमा को गांव स्थित पंचायत भवन के एक कमरे में स्थापित कर दी गई थी. हालांकि ये कुछ दिनों के लिए किया गया था, क्योंकि यह तय हुआ था की मंदिर बन जाएगा तो फिर से बिहारी जू को मंदिर में स्थापित कर दिया जाएगा. तब से लेकर आज 20 साल हो गए लेकिन मंदिर नहीं बन पाया. भगवान बिहारी जू के भक्तों को इंतजार है कि कब मंदिर का निर्माण हो और वो अपने आराध्य की विधिवत स्थापना कर सकें.
ग्रामीण बताते हैं कि पहले मंदिर का संचालन निजी हाथों में था. लेकिन मंदिर गिरने के बाद इसके निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को दे दी गई. लेकिन राजस्व विभाग अभी तक मंदिर का निर्माण नहीं करा पाया है.
करीब 100 वर्ष पहले मंदिर का निर्माण ग्राम के एक संपन्न किसान के द्वारा कराया गया था और इस समय उन्होंने 62 एकड़ जमीन भी मंदिर को दान कर दी थी. वहीं इस मामले में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर का कहना है कि "इस संबंध में तहसीलदार से बात की है. कुछ कानूनी अड़चन आ रही हैं. उन्हें दूर किया जा रहा है. मंदिर का निर्माण शीघ्र ही शुरू होगा."