सागर में महाराणा प्रताप, महाराज छत्रसाल की शोभायात्रा में क्षत्रिय समाज का पराक्रम और एकता
सागर में भारत माता के वीर सपूत महाराणा प्रताप और बुंदेल केसरी महाराज छत्रसाल की जयंती पर क्षत्रिय समाज ने सागर में भव्य शोभायात्रा एवं वाहन रैली निकाली। यह ऐतिहासिक यात्रा स्वीडिश मिशन ग्राउंड से प्रारंभ होकर विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए महाकवि पद्माकर सभागार पहुंची, जहां विशाल आमसभा का आयोजन हुआ।
हजारों वाहनों के काफिले में सजे वाहनों पर भगवा पताकाएं लहरा रही थीं और महाराणा प्रताप व छत्रसाल की झांकी सजाई गई थी। रैली मार्ग पर जगह-जगह शहरवासियों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। पूरे शहर में महाराणा प्रताप अमर रहें और महाराज छत्रसाल की जय के जयघोष गूंजते रहे। डी.जे. पर देशभक्ति के गीत बजते रहे और लोग उत्साहपूर्वक नारे लगाते चलते रहे।
महाकवि पद्माकर सभागार में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश शासन के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा, क्षत्रिय समाज ने कभी किसी की अधीनता स्वीकार नहीं की है। हमारे पूर्वज त्याग, राष्ट्रभक्ति और पराक्रम के प्रतीक हैं। महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं बल्कि एक विचार हैं – वह विचार जो अन्याय के विरुद्ध खड़ा होता है और स्वतंत्रता के लिए जीता है। उन्होंने आगे कहा, बुंदेल केसरी महाराज छत्रसाल ने मात्र 22 वर्ष की उम्र में मुगलों को चुनौती दी और धर्म व मातृभूमि के लिए लड़ाई लड़ी। उनकी ज्वाला आज भी हमारे भीतर जिंदा है। उन्होंने क्षत्रिय समाज को एकजुट होकर समाज और राष्ट्र सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मंत्री राजपूत ने क्षत्रिय समाज के लिए 1 करोड़ रुपये भवन निर्माण हेतु देने की घोषणा की। विधायक शैलेन्द्र जैन ने 50 लाख और सांसद ने 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। सभा में जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, सांसद लता बानखेड़े, भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी, युवा नेता आकाश सिंह राजपूत सहित अनेक गणमान्य लोगों ने क्षत्रिय समाज के योगदान को सराहा। शोभायात्रा के स्वागत के लिए सागर शहर में सौ से अधिक स्थानों पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, मंदिर समितियों और आमजन ने स्वागत किया। इस ऐतिहासिक रैली और कार्यक्रम ने न सिर्फ क्षत्रिय समाज की एकता और गौरव को प्रदर्शित किया, बल्कि मातृभूमि के प्रति उनके समर्पण को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।