सागर- गढ़पहरा के किसानों ने किया भूमि अधिग्रहण का विरोध, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी | sagar tv news |
सागर जिले की नरयावली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गढ़पहरा मुहाल और गढ़पहरा रैयतवारी गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने दिल्ली-नागपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का कड़ा विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि का जबरन अधिग्रहण कर सरकार उन्हें उनकी आजीविका से वंचित करने जा रही है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य है। इस विरोध के स्वर तब और मुखर हो गए जब ग्रामीणों ने मध्यप्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को रोका नहीं गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि वे पीढ़ियों से इस भूमि पर खेती कर रहे हैं, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। यह केवल जमीन नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक और सामाजिक पहचान है। भूमि छिनने का मतलब है – बेरोजगारी, भुखमरी और विस्थापन। एक बुजुर्ग किसान ने भावुक होते हुए कहा, हमने खून-पसीने से इस जमीन को सींचा है, आज सरकार इसे कॉरिडोर में समर्पित करना चाहती है, लेकिन हम इसे किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर विकास बनाम आजीविका की बहस को जन्म दे दिया है। सरकार जहां परियोजना को औद्योगिक प्रगति और रोजगार के अवसरों के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं प्रभावित किसान इसे अन्यायपूर्ण अधिग्रहण मान रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि उनकी जमीन को परियोजना से बाहर रखा जाए। यदि अधिग्रहण आवश्यक हो तो उन्हें उचित मुआवजा, वैकल्पिक कृषि भूमि और रोजगार की गारंटी दी जाए।
सरकार अधिग्रहण से पहले ग्रामीणों की सहमति सुनिश्चित करे। अब तक स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे ग्रामीणों में असंतोष और आशंका और अधिक गहराती जा रही है। ग्रामीण संगठनों ने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार ने जल्द ही समाधान नहीं निकाला, तो वे जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे।