Sagar- मिल गया बिना बिजली से चलने वाला फ्रिज, जानकर हो जाएंगे हैरान
सागर यूनिवर्सिटी ज्ञान विज्ञान का मध्य प्रदेश का एक पुराना प्रसिद्ध केंद्र है, तो दूसरी तरफ इस यूनिवर्सिटी के संग्रहालय में एक से बढ़कर एक चीज रखी हुई है. यूनिवर्सिटी के वैली कैंपस में संस्थापक डॉ. हरि सिंह गौर के नाम से गौर संग्रहालय स्थापित किया गया है. जहां डॉ हरीसिंह गौर से जुड़ी वस्तुओं और उनके साहित्य के अलावा मध्य प्रदेश की कला, संस्कृति और सेना के शौर्य से जुड़ी वस्तुओं के अलावा मेडिकल म्यूजियम भी बनाया गया है.
मेडिकल म्यूजियम में जहां द्वितीय विश्व युद्ध में घायल सैनिकों के इलाज के लिए उपयोग में लाए गए मेडिकल उपकरण रखे है, तो यहां पर उस जमाने का एक रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) भी रखा हुआ है. जिसमें दवाएं रखी जाती थी. इसकी खास बात ये है कि ये फ्रिज आज के फ्रिज की तरह बिजली से नहीं, बल्कि केरोसिन से चलता था.
दरअसल ये उस दौर का फ्रिज है, जब बिजली का तो आविष्कार हो गया था, लेकिन बिजली की उपलब्धता इतनी आसान नहीं थी. यदि बिजली मौजूद भी थी तो लगातार बिजली की आपूर्ति नहीं हो पाती थी. ऐसे में उन जरूरी वस्तुओं के लिए फ्रिज का अविष्कार किया गया था, जिनको ठंडी स्थान पर रखना जरूरी था. आज से करीब 100 साल पहले इस फ्रिज का उपयोग किया जाता था. इस फ्रिज का उपयोग खासकर दवाओं और ऐसी वस्तुओं के लिए किया जाता था, जिनको काफी कम तापमान की जरूरत होती थी.
दरअसल इस फ्रिज के पिछले हिस्से में केरोसिन भरने के लिए एक बॉटल नुमा उपकरण लगा रहता था. जिसके नीचे एक बर्नर लगा रहता था, जो केरोसिन को जलाकर गरमी पैदा करता है. फ्रिज में पानी, अमोनिया और हाइड्रोजन गैस की नलियां और चेंबर होते थे. बर्नर के जरिए केरोसिन के जलने से अमोनिया गैस वाष्प में बदलती है, जो फ्रिज में ऊपरी हिस्से में पीछे तरफ लगे क्वाइल को ठंडा करती है. जो फ्रिज को ठंडा रखती थी. वहीं क्वाइल ठंडा होने से गैस फिर से तरल रूप में वाष्पीकृत होती है और यही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है. जिससे फ्रिज ठंडा बना रहता था.