सागर में बाल संरक्षण आयोग की टीम ने छात्रावास भवन में संचालित हो रहा घरौंदा आश्रम का किया निरीक्षण
सागर के तिली क्षेत्र में स्थित घरौंदा आश्रम का राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ने बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों के साथ निरीक्षण किया। उन्हें आश्रम में कई अनियमितताएं मिली हैं। बालक और बालिकाएं एक ही परिसर में मिली। आश्रम में मृत हुए लोगों का देहदान किया गया है, जिसको लेकर आयोग के सदस्य ने नाराजगी जताई है। साथ ही देहदान समेत अन्य दस्तावेज मांगें हैं। आश्रम में मानसिक दिव्यांग बच्चे रहते हैं। इसके साथ ही मानसिक रूप से कमजोर व दिव्यांग 18 वर्ष से अधिक के लोग भी इस आश्रम में रहते हैं। आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने जब निरीक्षण किया तो यहां पाया गया कि महिला और पुरुषों को एक परिसर में रखा गया है। इसके साथ ही आश्रम अनुसूचित जाति के छात्रावास के भवन में संचालित हो रहा है। यह भवन जनजातीय कार्य विभाग का है जो ठेकेदार ने अब तक भवन विभाग को हेंडओवर नहीं किया है। मामले में टीम आश्रम के सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि घरौंदा आश्रम से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में देहदान किया गया है, जिनमें एक बच्ची जो की 18 वर्ष से कम उम्र में आश्रम में आई थी। उसकी मृत्यु होने के बाद उसका भी बिना किसी की अनुमति के देहदान कर दिया गया। जिस पर आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने आपत्ति जताई। साथ ही आश्रम की संचालिका को समझाइश दी है। उन्होंने देहदान से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।
आयोग सदस्य सिंह ने कहा कि आश्रम में रहने वाले किसी भी सदस्य का बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार करवाना नियम विरुद्ध है। साथ ही किसी का भी देहदान करना गलत है क्योंकि जो भी आश्रम में रह रहा है, उसकी आश्रम में मृत्यु होने पर उसका पोस्टमार्टम करना जरूरी है। ताकि यह पता चल सके कि व्यक्ति की मृत्यु किस कारण से हुई है। निरीक्षण के दौरान किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य वंदना तोमर, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष किरण शर्मा, सदस्य अनीता राजपूत, भगवत शरण बावरिया, अनिल रैकवार, सुरेंद्र सेन समेत सामाजिक न्याय विभाग वासुदेव गौंड, आदिम जाति कल्याण विभाग समीष अहिरवार, आईसीपीएस पुष्पेंद्र मिश्रा व पुलिसकर्मी मौजूद थे। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग भोपाल के सदस्य ओंकार सिंह ने बताया कि घरौंदा आश्रम का निरीक्षण किया गया। आश्रम में 18 साल तक के दिव्यांग बच्चों को सीडब्ल्यूसी भेजती है। घरौंदा आश्रम को सिर्फ बालकों को रखने का पंजीयन है। इसके अलावा 18 वर्ष अधिक के बच्चे व पुरुषों को भी रखने की अनुमति है। लेकिन उनको बालिकाओं को रखने की अनुमति नहीं है। आश्रम में बालिकाएं मिली हैं। जिस भवन में आश्रम संचालित हो रहा है। वह जनजातीय कार्य विभाग का है। उक्त भवन छात्रावास का है। भवन ठेकेदार ने विभाग को हेंडओवर नहीं किया है। लेकिन उसमें आश्रम संचालित हो रहा है। इसके अलावा आश्रम से देहदान किया गया है। यह नियम विरुद्ध है। बीएमसी से भी मामले में जानकारी ली गई है। मामले में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होना चाहिए।