Sagar-देवरी के पटेल और झुंकू वार्ड में पेयजल संकट, कलेक्टर के नाम सौंपा गया ज्ञापन
सागर जिले की देवरी में भीषण गर्मी के बीच देवरी नगर पालिका क्षेत्र के पटेल वार्ड और झुंकू वार्ड के रहवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। जल संकट से परेशान सैकड़ों लोगों ने पटेल वार्ड के पार्षद त्रिवेंद्र जाट के नेतृत्व में अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचकर सागर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि दोनों वार्डों में जल्द से जल्द पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पटेल वार्ड और झुंकू वार्ड के सिलारी और बरिया मोहल्ला इलाकों में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है। रहवासियों ने बताया कि जल सप्लाई के दौरान नलों में केवल हवा आती है, पानी नहीं आता। इसके बावजूद नगरपालिका द्वारा हर महीने जलकर वसूला जा रहा है। रहवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार इस समस्या को लेकर नगरपालिका और प्रशासन को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। यहां तक कि सागर कलेक्टर द्वारा जिलेभर में पेयजल संकट से निपटने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं, फिर भी देवरी में प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिल रही है।
गंभीर जल संकट के कारण वार्ड के लोगों को करीब 1 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। परेशान होकर वार्डवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 7 दिनों में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अनुविभागीय कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे। पार्षद त्रिवेंद्र जाट ने बताया कि उन्होंने पहले भी कलेक्टर, एसडीएम और सीएमओ को कई बार लिखित में शिकायत दी थी, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। उन्होंने मांग की है कि बीआरसी कार्यालय के पास स्थित पानी की टंकी से पटेल और झुंकू वार्ड के इलाकों को जोड़ा जाए ताकि जल संकट से राहत मिल सके। जब तक यह व्यवस्था नहीं होती, तब तक दोनों वार्डों में प्रतिदिन 2 टैंकर से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
इस मौके पर नायब तहसीलदार रामराज चौधरी ने कहा कि ज्ञापन प्राप्त हुआ है और इसे सागर भेज दिया गया है। नगरपालिका को पत्र भेजकर इस इलाके में प्रतिदिन जल आपूर्ति के निर्देश दिए जाएंगे ताकि समस्या का तत्काल समाधान किया जा सके।
वार्ड निवासी नेहा जाटव ने बताया कि बरिया मोहल्ला में पानी न आने के कारण उन्हें 1 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। वहीं, क्रांति जाटव ने कहा कि गर्मी के मौसम में तीन महीने तक पानी की भारी किल्लत होती है और बार-बार शिकायत के बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है या फिर लोगों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।