Kesari-2: जलियांवाला बाग से जुड़े एक वीर की कहानी, कौन थे असली हीरो सी शंकरन नायर? #kesarichapter2
अक्षय कुमार की आने वाली अगली फिल्म केसरी चैप्टर 2 का टीजर सामने आने के बाद से ही एक नाम चर्चा में है, और वो नाम है सी शंकरन नायर का। फिल्म में अक्षय उनका किरदार निभा रहे हैं और ये कहानी जलियांवाला बाग हत्याकांड से जुड़े एक ऐसे शख्स पर फिल्माई गयी है, जिसने इस घटना के खिलाफ ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी।
लेकिन सवाल ये है कि आखिर सी शंकरन नायर थे कौन? और क्यों उन पर एक पूरी फिल्म बनाई जा रही है?
दरअसल, सी शंकरन नायर का जन्म अठरह सौ सत्तावन को केरल के पलक्कड़ जिले के मनकारा गांव में हुआ। उनके पिता ब्रिटिश प्रशासन में तहसीलदार थे, जिससे उन्हें शिक्षा का वो मौका मिला जो उस दौर में कई भारतीयों को नहीं मिल पाता था। नायर ने कानून की पढ़ाई के बाद मद्रास हाई कोर्ट में एडवोकेट के रूप में करियर शुरू किया। वे एडवोकेट जनरल बने और फिर हाई कोर्ट के जज भी रहे।
1904 में उन्हें कम्पेनियन ऑफ इंडियन एम्पायर की उपाधि मिली और वे ब्रिटिश वायसरॉय की काउंसिल में शामिल हुए — उस दौर में काउंसिल में मौजूद पांच सदस्यों में से वे इकलौते भारतीय थे। ये अपने आप में एक बड़ी बात थी, क्योंकि उस दौर में किसी भारतीय को इतने ऊंचे पद पर जगह मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन जैसा था।
अब आते हैं उस घटना पर जिस पर ये मूवी बनाई गयी है। ये बात है 13 अप्रैल 1919 की, जब अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिगेडियर जनरल डायर के एक आदेश पर सैकड़ों निहत्थे भारतीयों को मौत के घाट उतार दिया गया। इस घटना में पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओड्वायर ने भी पूरी तरह डायर का साथ दिया। इसके बाद पूरे पंजाब में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और प्रेस पर पाबंदी लगा दी गई।
लेकिन एक ब्रिटिश पत्रकार बेंजामिन होर्नीमैन ने इस सच्चाई को उजागर कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। जब ये खबर शंकरन नायर तक पहुंची तो वे बेहद आहत हुए। पहले उन्होंने इस्तीफा देने का मन बनाया, लेकिन मोतीलाल नेहरू और अन्य राष्ट्रवादी नेताओं ने उन्हें रोकते हुए कहा कि वे सरकार में रहकर दबाव बनाएं।
पर जब उन्होंने ब्रिटिश सरकार से जनरल डायर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तब जुलाई 1919 में शंकरन नायर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। एकमात्र भारतीय सदस्य का इस्तीफा देना उस समय एक बड़ा राजनीतिक संदेश था, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा और हंटर कमीशन नाम की जांच समिति बनाई गई।
लेकिन नायर शांत न बैठे और नायर ने मद्रास लौटकर एक किताब लिखी — Gandhi and Anarchy। इसमें उन्होंने गांधी जी की असहयोग नीति पर सवाल उठाए, लेकिन साथ ही उन्होंने ओड्वायर और जनरल डायर की कड़ी आलोचना भी की। इस पर ओड्वायर ने उन पर मानहानि का केस कर दिया, जो लंदन की किंग्स बेंच कोर्ट में चला। इस केस के जरिये उन्होंने दुनिया के सामने ब्रिटिश हुकूमत की पोल खोल दी।
किंग्स बेंच के इतिहास में ये सबसे लंबी सुनवाई थी क्योंकि ये मुकदमा पांच हफ्ते तक चला। भले ही केस का फैसला ओड्वायर के पक्ष में गया, लेकिन शंकरन नायर ने न झुकने का फैसला किया। उन्हें या तो माफी मांगनी थी या फिर करीब 7500 पाउंड जो आज के हिसाब से लगभग 6 करोड़ रुपये का जुर्माना भरना था। उन्होंने माफी मांगने के बजाय जुर्माना चुना।
फिल्माई गयी इस कहानी की बात करें तो नायर का मकसद जलियांवाला बाग की सच्चाई को दुनिया के सामने लाना था — और वे इसमें सफल हुए। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ उनका संघर्ष आज भी प्रेरणा देता है।
केसरी 2 में अक्षय कुमार कोर्ट के जिस सीन में दिखते हैं, वो दरअसल इसी ऐतिहासिक मुकदमे की झलक है। बताते चले कि ये फिल्म जलियांवाला बाग के 106 वीं साल पर, बैसाखी के दिन 18 अप्रैल 2025 को रिलीज होगी।
फिल्म के जरिए न केवल नायर की वीरता लोगों के सामने आएगी, बल्कि यह भी याद दिलाया जाएगा कि भारत की आज़ादी की लड़ाई केवल मैदान में नहीं, अदालतों और कलम से भी लड़ी गई थी।