सागर बीएमसी की लचर व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन डीन या....?
ये है सागर का बुंन्देलखंड मेडिकल कॉलेज, साल 2009 में जब ये शुरू हुआ तो एक उम्मीद जागी की सागर के लोगो को अब आधुनिक और बेहतर मेडिकल सुविधाओ सागर में ही मिलेगी इसके लिए उन्हें से बाहर नहीं जाना होगा। सागर के मरीजों के लिए नागपुर भोपाल इंदौर मुंबई दिल्ली जैसे बड़े शहरों में अब नहीं भटकना होगा। लेकिन क्या आज 15 साल गुजर जाने के बाद भी ये कहा जा सकता है की बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज का सागर में खोले जाना सार्थक साबित हुआ ? इस सवाल का जवाब आज की इस खास खबर में तलाशने की कोशिश करेंगे।
वैसे तो इन 15 सालो बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में बहुत कुछ ऐसा घटित हुआ जिसे आज याद किया जाये तो आपकी की रूह काँप जाये। लेकिन बीते दीनो हुई एक ऐसी ही घटना जिसने सबकी रूह को एक बार और कपा दिया वो थी एक डेड साल की मासूम बच्ची की वार्मर मशीन में झुसलने से मौत का मामला दरअसल इस बच्ची को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था जहाँ उसकी मौत हो गयी। परिवार वालो ने आरोप लगाया की ये मेडिकल कॉलेज की लापरवाही के कारण हुआ है जबकि यहाँ के डॉक्टर का एक पत्र वायरल हुआ है जिसमें उन्होंने बच्ची की दादी पर ही बिटिया होने की वजह से जानबूझकर ऐसा करने की आरोप लगा गया। आज इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है ये पता लगाने की कोशिश करेंगे ?